ranjit singh story in hindi

Maharaja Ranjit singh Story In Hindi :- दोस्तों इस पोस्ट मे आपको जानने के लिए मिलेगा Maharaja Ranjit Singh Biography In Hindi और Maharaja Ranjit Singh History In Hindi मे पढने के लिए मिलेगी

Maharaja Ranjit singh Story In Hindi

महाराजा रणजीत सिंह

 

महाराजा रणजीत सिंह जी के पूर्वज – Maharaja Ranjit singh ji Ke Purvaj

 Maharaja Ranjit singh Story In Hindi-श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के समय एक योद्धा थे जिनका नाम बूढ़ा मल थे|
बाबा  बूढ़ा मल जी ने गुरु गोबिंद सिंह जी के हाथो अमृत पान किया था और
उनकी खालसा फ़ौज में भर्ती हुए थे |अमृत पान के बाद बाबा  बूढ़ा मल जी
का नाम बदल कर बुध सिंह रखा गया |

उनके शारीर पर 40 निशान थे जो उन्हें युद्ध करते हुए मिले थे जिनमे गोलियों,
तलवारों ,तीरों के निशान शामिल थे |बाबा  बुध सिंह सिंह की घोड़े का नाम देशा था

Maharaja Ranjit Singh Biography In Hindi

जिस वजह से उन्हें देशा बुध सिंह के नाम से भी जाना जाता था |बाबा बुध सिंह
के घर 2 पुत्र पैदा हुए थे |जिनके नाम नोध सिंह और चंदा सिंह था |

बाबा नोध सिंह जी ने अपने पिता की म्रत्यु के बाद गुजरावाले जगह पर शुकर चक
मिसल की स्थापना की जहा उन्होंने 30 नोजवानो की अपनी एक खालसा  फ़ौज
तेयार की जहा वही भाग ले सकता  था जो अमृत पान करके गुरु का सिख बन जाये|

Maharaja Ranjit singh Story In Hindi

समय के साथ साथ उनकी  खालसा फौज काफी बड़ी सेना बन गयी जिनका काम
हो रहे अत्याचार को खतम करना और गरीबो जरूरत मंदों की पठानों और अन्य
विरोधियो से रक्षा करना था|

बाबा  नोध  सिंह की म्रत्यु  के बाद उनके पुत्र बाबा चढत सिंह जी ने
यह कमान संभाली |बाबा चढत सिंह जी के 2 पुत्र महां सिंह और सोज
सिंह हुए |बाबा चढत सिंह जी के बाद सरदार महां सिंह जी ने शुकर
चक मिसल  की कमान संभाली |जिनका विवाह माता राज कौर के
साथ हुआ |जो महाराजा रणजीत सिंह के माता पिता थे

 

महाराजा रणजीत सिंह जी का जन्म और बचपन –

Maharaja Ranjit Singh Ji Ka Janam Or Bachpan

महाराजा रणजीत सिंह का जन्म 14 नवम्बर 1780 मै गुजरावाले की धरती
पर सरदार महां सिंह जी और  माता राज कौर के  घर हुआ |अभी रणजीत सिंह
छोटे ही थे उन्हें चेचक की बीमारी हो गयी वह काफी कमजोर हो गये |बीमारी की
वजह से उनकी एक आंख की रौशनी 6 वर्ष की उम्र में चली गयी |

Maharaja Ranjit singh Story In Hindi

पर वह बालक अनोखा था उनकी आँख खराब होने का उन पर कोई भी
प्रभाव नहीं हुआ |वह तलवार बाजी और घुड़सवारी सीखते हुए थोड़े बड़े हो गये |
उनके पिता सरदार महां सिंह अपनी मिसल की रक्षा के लिए आस पास के सरदारों
से जंग करते रहते |जिसका  प्रभाव रणजीत सिंह पर पड़ने लगा और वह भी
तलवारबाजी और घुड़सवारी में  कुशल हो गये |

छोटी सी ही उम्र में उनकी तलवार के आगे कोई नहीं टिक पाता था |
कुछ समय बाद साहिब सिंह  भंगी जो दुसरे मिसल का सरदार था
उसने आक्रमण किया इस लड़ाई में रणजीत सिंह  भी अपने पिता के
साथ मैदान में उतरे लड़ाई शुरु हो गयी लड़ाई के कुछ समय बाद
सरदार महां सिंह जी की तबियत खराब हो गयी उनका स्वास्थ्य
पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल  रहा था |

Maharaja Ranjit singh Story In Hindi

जिसकी वजह से उन्हें घर वापिस जाना पड़ा ,सरदार महां सिंह जी ने
उस लड़ाई की  कमान अपने पुत्र रणजीत सिंह को दी और कहा  फ़तेह
करके जल्दी आना |रणजीत सिंह ने जल्द ही वह लड़ाई फ़तेह की और
घर वापसी के लिए रवाना हो गये |

पर जब वह घर पहुचे तो उन्हें पता चला सरदार महां सिंह जी अब उनके
साथ नहीं थे |छोटी सी उम्र में पिता का साया उनके सर से उठ  गया था |
बीमारी की वजह से सरदार महां सिंह जी की म्रत्यु  हुई उस समय रणजीत
सिंह की उम्र 12  वर्ष थी |पिता के  चले जाने के बाद रणजीत सिंह को
उनकी माँ और दादी माँ ने संभाला |

महाराजा रणजीत सिंह और हशमत खां –

Maharaja Ranjit Singh or Hashmat Khan Story In Hindi

जब रणजीत सिंह 13 वर्ष के हुए तो एक बार वह शिकार खेलते हुए
वह अपने इलाके से बाहर निकल कर हशमत खां चता के इलाके
मै आ पहुचे |  हशमत खां  रणजीत सिंह के पिता और उनसे वैर रखता था |
मौका देख कर हशमत खां ने रणजीत सिंह पर हमला कर दिया |लड़ाई में
रणजीत सिंह ने हशमत  खां को मार गिराया |

महाराजा रणजीत सिंह का विवाह – Maharaja Ranjit Singh Ka Vivaah

16 वर्ष की उम्र में रणजीत सिंह का विवाह महताब कौर के साथ हुआ |

महताब कौर कन्हिया मिसल के सरदार की बेटी  थी |इनके पिता का नाम

गुरबक्श सिंह कन्हिया था और माता का नाम सदा कौर था |

शेर-ए -पंजाब के नाम से केसे जाने गए –

Maharaja Ranjit Singh Sher _A_Punjab ke Naam Se Kaise Jaane Gaye

1796  में अफगानी सेना  जो काबुल से आ रही थी जिनका सरदार शाह
ज़मान था वह दिली पर कब्ज़ा करना चाहता था| दिली जाने के लिए
उसकी सेना को पंजाब से गुजरना था |तब रणजीत सिंह ने 5000 घुड
सनिको के साथ उनका रास्ता रोका और उन्हें बहुत बुरी तरह से पराजित
कर जेलम नदी तक उन्हें  वापिस खदेड़ा |(Maharaja Ranjit singh Story In Hindi)

यह उनकी बहोत बड़ी जीत थी| इसके बाद उनका नाम दूर दूर तक फ़ैल
गया इस बीच हमले होते रहे और रणजीत सिंह अपनी सेना के साथ मिलकर
उनका मुहतोड़ जवाब देते रहे |इसके बाद से ही वह शेर-ए -पंजाब के नाम से जाने गए |

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महाराजा का ख़िताब – Maharaja Ka Khitab कब मिला

सभी  मिसलो के सरदारों ने मिलकर उन्हें महाराजा का ख़िताब देने
पर  चर्चा की और  12 अप्रैल 1801 को वैसाखी वाले दिन बाबा साहिब
सिंह जी बेदी के हाथो उनका तिलक हुआ| इसके बाद उन्होंने लाहौर
पर कब्ज़ा किया |क्योकि लाहौर की प्रजा अपने सरदारों से बहुत दुखी थी |

वहा की प्रजा महाराजा रणजीत सिंह जी को अपने राजा के रूप मै
देखना चाहती थी |इसकी जानकारी लाहौर की प्रजा ने उन्हें एक
ख़त लिख कर दी थी |लाहौर को अपनी राजधानी बानाने के बाद
उन्होंने गुरु नानक शाही सिक्के और पैसे चलवाए |महाराजा रणजीत
सिंह जी ने अमृतसर जाके मंदिर पर सोने का जीर्णोधार करवाया |(Maharaja Ranjit singh Story In Hindi)

अब कोई भी हुकूमत उनके राज्य का कुछ भी  नहीं बिगाड़ पाती थी |
अंग्रेजो का शासन दुसरे प्रान्तों में था पर वह पंजाब में नहीं आ पा रहे थे |
उस समय अंग्रेजों का राज्य यमुना तक पहुँच गया था, जिस वजह से
फुलकियाँ मिस्ल के राजा अंग्रेजी राज्य के बातो  को मानने लगे थे।

Maharaja Ranjit Singh Biography In Hindi

अंग्रेजों ने रणजीत सिंह से लड़ना उचित नहीं समझा तथा  संधि कर

ली कि सतलज के आगे हम अपना राज्य नही  बढ़ाएँगे| रणजीत सिंह

फ्रांसीसी सैनिकों को अपने राज्य में बुलाकर अपनी सेना को विलायती

ढंग पर तैयार करवाया करते थे |

अब महाराजा रणजीत सिंह जी ने मुल्तान, पेशावर और कश्मीर तक अपने

राज्य को बढ़ा लिया था परन्तु उन्हें इसके लिए कई वर्षों तक कड़ा संघर्ष करना पड़ा था|

कुछ अन्य कहानिया
Maharaja Ranjit Singh History In Hindi

महाराजा रणजीत सिंह की संतान –

खड़क सिंह, ईशर सिंह, शेर सिंह, तारा सिंह, कश्मीरा सिंह, पेशौरा सिंह, मुल्ताना सिंह, दलीप सिंह,इन्द्रपाल सिंह

महाराजा  रणजीत सिंह का विजय अभियान

  • 1803 में अकालगढ़ पर विजय प्राप्त की
  •  1804 में डांग तथा कसूर पर विजय प्राप्त की
  • 1805 में अमृतसर पर विजय प्राप्त की
  •  1809 में गुजरात पर विजय प्राप्त की
  • 1806 में दोलाधी गाँव पर किया कब्जा किया
  • 1806 में ही लुधियाना पर जीत हासिल की की
  •  1807 में जीरा बदनी और नारायणगढ़ पर जीत हासिल की
  •  1807 में ही फिरोज़पुर पर विजय प्राप्त की
  • 1809 में कांगड़ा पर विजय प्राप्त की
  •  1818 में मुल्तान पर विजय प्राप्त की
  • 1813 में कटक राज्य पर विजय प्राप्त की
  • 1819 में कश्मीर पर विजय  प्राप्त की
  • 1820-21 में डेराजात की विजय प्राप्त की
  • 1823-24 में पेशावर की विजय प्राप्त की
  • 1836 में लद्दाख की विजय प्राप्त की

महाराजा रणजीत सिंह की म्रत्यु –

Maharaja Ranjit  Singh Ki Death Kaise Hui (Death Story in Hindi)

27 जून सन 1839 में महाराजा रणजीत सिंह जी  का निधन हो गया।
उनका निधन लाहौर(पाकिस्तान ) में हुआ । उनकी मौत के साथ ही
अंग्रेजों का पंजाब पर शिकंजा कसना शुरू हो गया क्योकि उनके जाने
के बाद पंजाब पर कब्ज़ा करना आसान हो गया था ।

30 मार्च 1849 में अंग्रेज-सिख युद्ध  में पंजाब ब्रिटिश साम्राज्य का अंग
बना लिया गया और वह कोहिनूर हीरा  महारानी विक्टोरिया के हुजूर
में पेश कर दिया गया।

Maharaja Ranjit  Singh Ji Death Story in Hindi

महाराजा रणजीत सिंह जी ने अपने राज में कभी भी  किसी अपराधी को
मृत्यु दंड नहीं दिया था।महाराजा रणजीत सिंह बड़े ही उदारवादी राजा रहे ,
किसी राज्य को जीत कर भी वह अपने शत्रु को बदले में कुछ ना कुछ जागीर
दे दिया करते थे ताकि वह अपना जीवन निर्वाह कर सके|

महाराजा रणजीत सिंह जी हिन्दू मंदिरों में मनों सोना चढ़ाया करते थे ।
काशी के विश्वनाथ मंदिर में भी उन्होंने बहुत  सोना अर्पित किया था|
महाराजा  रणजीत सिंह जी की इच्छा थी कि वे कोहिनूर हीरे को
जगन्नाथपुरी के मंदिर में प्रतिष्ठित भगवान जगन्नाथ को अर्पित करें|(Maharaja Ranjit singh Story In Hindi)

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सतश्रीअकाल दोस्तों मेरा नाम हरप्रीत सिंह है | सिंह फैक्ट डॉट काम मै आपका स्वागत है यहाँ पर आपको पढने के लिए मिलेगे रियल फैक्ट्स एंड स्टोरीज इन हिंदी मै और पंजाबी स्टेटस और शायरी , बस आप लोगो के प्यार और सपोर्ट की जरूरत है वह देते रहिये

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