भारत देश के 10 सबसे बड़े पुल | The Longest Bridge In India

Longest Bridge in India

The longest bridge in  india – नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है सिंह फैक्ट डॉट कॉम पर और आज के एक नाए लेख में जो की हमारे देश Bharat Ke  Sabse Bade Pul के बारे मे है अगर आपके दिमाग मे भी यह सवाल है की India ka sabse bada pul या
India Ka Sabse Lamba Pul kon Sa Hai ? India ka Sabse Bada Railway Bridge? Kaha Par Hai
Bharat ka sabse bade bridge Kon Kon से  है |

तो यहाँ आपके इन सरे सवालो के जवाब मिल जायेगे  है चलिए शुरू करते है The longest bridge in the india | भारत देश के 10 सबसे बड़े पुल 

किसी भी देश की संरचना में पुल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है पुलों (Bridge) के बिना उस देश की संरचना अधूरी सी लगती है। वैसे तो पुलों (Bridge) का निर्माण मुख्तय यात्रा के समय को कम करने और किसी नदी, या समुद्र के ऊपर बनाकर एक तरफ से दूसरे तरफ जाने के लिए होता हैं। पर कई पुल इतने विशाल होते जो एक अच्छा पर्यटक स्थल साबित होते दूर दूर से लोग मात्र उन्हें निहारने के लिए आते है

जैसा की आप सब जानते है पुल के निर्माण से कई लाभ जुड़े होते हैं, इससे अशिक्षत व्यक्तियों को रोजगार मिलता है तो कई शिक्षित इंजीनियर और आर्किटेक्ट को भी अपनी प्रतिभा और कौशलता दिखाने का मौका मिलता है। तो आज इस लेख की मदद से जानते है ऐसे ही भारत के कुछ पुलों के बारे मै जिनकी लम्बाई आपको हैरान कर देगी

भारत में भी ऐसे कई विशाल पुलों का निर्माण किया गया है, जिनका इस्तेमाल एक जगह से दूसरी जगह तक जाने के लिए किया जाता है, इन पुलों को बनाने में करोड़ों, अरबों रुपए खर्च किये जाते है

क्या आप जानते है भारत के सबसे लंबे पुल कौन से हैं – Longest Bridge in India

ढोला-सदिया पुल ( Dhola Sadiya Bridge ) / भूपेन हजारिका सेतु (Bhupen Hazarika Bridge) 26 मई, वर्ष 2017 |  Bharat Ke  Sabse Bade Pul

भूपेन हजारिका सेतु (Bhupen Hazarika Setu) भारत का सबसे लंबा और विशाल पुल है, यह पुल का नाम भारत के मशहूर संगीतकार, गायक , फिल्मकार भूपने हजारिका के नाम रखा गया है, भूपेन हजारिका जी की प्रतिभा की वजह से उन्हें वर्ष 2019 में भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है।

वैसे भूपने हजारिका सेतु का दूसरा नाम ढोला सदिया पुल भी है क्योकि यह पुल असम के ढोला और अरुणाचल प्रदेश के सादिया शहर को आपस में जोड़ता है। इसलिए यह इस नाम से भी जाना जाता है । यह विशाल पुल भारत की ब्रम्हपुत्र की एक सहायक नदी “लोहित नदी”पर बनाया गया है,

26 मई, वर्ष 2017 में भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत के सबसे लंबे इस पुल का उद्घघाटन किया था। वर्ष 2011 से इस पुल को बनाने की शुरुआत की गई थी, भूपेन हजारिका सेतु बनाने मे करीब 2056 करोड़ रुपए की लागत आयी है।

भूपेन हजारिका सेतु के बनने से असम और अरुणाचल प्रदेश दोनो राज्यों की बीच की दूरी करीब 165 KM कम हो गई है, जिसकी वजह से अब एक राज्य से दूसरे राज्य में पहुचने में महज 5 घंटे लगते हैं।

भूपेन हजारिका पुल के बनने से पिछड़े इलाकों को सड़क के माध्यम से जोड़ने में भी काफी मदत मिली है, जिससे वहा पर विकास कार्यों को बढ़ावा मिला है।

ढोला-सदिया पुल की लंबाई / चौड़ाई –

भूपेन हजारिका सेतु की कुल लंबाई 9.15 KM है, जबकि इस पुल की चौड़ाई 12.9 मीटर है।

ढोला-सदिया पुल बनने के कुछ फायदे

  • इस पुल के निर्माण से औद्योगिक निवेश में बढ़ोतरी हुई है।
  • ढोला-सदिया पुल के बनने से परिवहन नेटवर्क को मजबूती मिली है, जिससे विकास को बहुत त्रीव गति मिल रही है।
  • ढोला-सदिया पुल के निर्माण से सबसे ज्यादा फायदा भारतीय सेना को हुआ है और यह एक फैक्ट भी है की यह पुल काफी मजबूत है, इसके साथ ही यह पुल सेना के 60 टन टैंकों के भार को संभालने की क्षमता भी रखता है।

 

महात्मा गांधी सेतु – Mahatma Gandhi Setu वर्ष 1982

महात्मा गांधी सेतु भारत का दूसरा सबसे लंबा और विशाल पुल है, इस पुल को गंगा सेतु के नाम से भी जाना जाता है। यह गांधी सेतु बिहार में गंगा नदी के ऊपर उत्तर-दक्षिण की दिशा में बना हुआ है, एशिया का सबसे बड़ा पुल होने का रिकॉर्ड इसी पुल के नाम है।

महात्मा गांधी सेतु की लंबाई 5.75 KMऔर चौड़ाई 25 मीटर है, यह पुल पटना से हाजीपुर को जोड़ता है। इस पुल को बनाने में करीब 10 वर्ष का समय लगा था। और इस पुल का निर्माण गैमोन इंडिया लिमिटेड कंपनी ने किया था,

भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी ने वर्ष 1982 में महात्मा गांधी सेतु का उद्घाटन किया था। इस पुल के निर्माण में करीब 87.22करोड़ रुपए की लागत आयी है। यह पुल पटना शहर को उत्तर बिहार और नेपाल के अन्य पर्यटन स्थल को सड़क के माध्यम से भी जोड़ता है। वहीं वर्तमान आकड़ो के अनुसार में इस पुल से रोजाना करीब 1 से डेढ़ लाख वाहन गुजरते हैं।

 

बांद्रा-वर्ली समुद्र सेतु – Bandra–Worli Sea Link 24 मार्च, 2010 | Longest Bridge In The India

बांद्रा वर्ली सी लिंक भारत का तीसरा सबसे लंबा और विशाल पुल है, यह पुल महाराष्ट्र राज्य के मुंबई के दो क्षेत्र बांद्रा और वर्ली को आपस में जोड़ता है। इस पुल की लंबाई 5.57 KM है और चौड़ाई करीब 66 फीट की है।

बांद्रा-वर्ली समुद्र सेतु में करीब 8 लेन बनाई गई है। बांद्रा-वर्ली पुल को बनाने की शुरुआत वर्ष 2000 में की गयी थी, जिसे बानाने में करीब 10 वर्ष का समय लगा यह पुल 24 मार्च, 2010 तक पूरी तरह बनकर तैयार हो गया था इस पुल का निर्माण हिन्दुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी द्धारा किया गया था।

हालांकि बांद्रा-वर्ली समुद्र सेतु का उद्घाटन पुल बनने के दौरान ही 30 जून, 2009 में कर दिया गया था, उद्घाटन के समय पर 8 लेन में से 4 लेन बनकर तैयार हो चुकी थी । बांद्रा-वर्ली समुद्र सेतु बनाने में करीब 16 अरब रुपए की धनराशि का खर्च की गयी है।
जहा पहले मुंबई के बांद्रा से वर्ली पहुंचने में करीब 80 मिनट तक का का समय लग जाता था , लेकिन अब इस पुल के बनने से सिर्फ 6-7 मिनट में यह दूरी पूरी की जा सकती है।

बोगिबील सेतु – Bogibeel Bridge वर्ष 2018 |  Longest Bridge In The India

ब्रह्मपुत्र नदी पर बना बोगिबील सेतु भारत का चौथा सबसे विशाल पुल है, इस ब्रिज की लम्बाई 4.94 KM(16,210 फीट) है। आपको जानकारी के लिए बता दें यह भारत के पहला और एशिया का दूसरा सबसे लंबा रेलवे और रोड ब्रिज है।

इस ब्रिज के ऊपर 3 लाइन की एक रोड है और 4.94 KM लंबे इस ब्रिज के नीचे दोहरी रेल लाइन है। यह ब्रिज ब्रह्पुत्र नदी के जलस्तर से करीब 32 मीटर की ऊंचाई पर बनाया गया है।

यह भारत का सबसे बड़ा लंबा रेलवे और रोड ब्रिज असम के धेमाजी और डिब्रुगढ़ को आपस मे जोड़ने का कार्य करता है। इस पुल के निर्माण की शुरुआत वर्ष 2002 में की गई थी, जिसे वर्ष 2018 के अंत में पब्लिक के लिए खोल दिया गया था। बोगिबील सेतु के निर्माण कार्य में 50 बिलियन से भी ज्यादा रुपए की लागत आ चुकी है।

इस पुल की टेस्टिंग का कार्य जर्मनी ने किया है। और पुल की ख़ास बात यह है कि इस तरह की तकनीक से स्वीडन और डेनमार्क को जोड़ने वाले पुल को बनाया गया है।

 

विक्रमशिला सेतु – Vikramshila Setu |Longest Bridge In The India

विक्रमशिला सेतु भारत की गंगा नदी पर बना भारत का पांचवा सबसे लंबा और विशाल पुल है। इस पुल की कुल लंबाई 4.7 KM(15,400 फीट) है। यह पुल बिहार के भागलपुर मे स्थित है।

विक्रमशिला सेतु के निर्माण की शुरुआत वर्ष 2001 में की गई थी। आपको बता दे महात्मा गांधी सेतु के बाद विकमशिला सेतु बिहार का दूसरा सबसे लंबा पुल है।

4.7 KMलंबे विक्रमशिला सेतु में दो लेन बने हुए है यह पुल गंगा नदी के विपरीत किनारे पर चल रहीं दो बड़ी सड़कें NH-80 और NH-31 के बीच एक लिंक के रुप में कार्य करता है।

यह ब्रिज भागलपुर को पूर्णिया और कैथीर से भी जोड़ता है, इस पुल के निर्माण की वजह से लोगों को काफी सुविधा हुई हैं, क्योंकि इसकी वजह से यात्रा की दूरी काफी हद तक कम हो गई है।

विक्रमशिला पुल के माध्यम से रोजाना बहुत बड़ी तादाद में लोग आवागमन करते हैं, इस ब्रिज में बढ़ते यातायात की वजह से भारत सरकार द्वारा इसके बगल मे एक नया पुल बनाने पर विचार विमर्श किया जा रहा है। और जून 2018 मे इस बात की मंजूरी भी दे दी गई है।

 

वेंबनाद रेलवे ब्रिज – Vembanad Rail Bridge 31 मार्च वर्ष 2010

वेंबनाद पुल भारत का छठवां और केरल राज्य का पहला सबसे लंबा पुल है, यह पुल केरल के सुंदर झील वेंबनाद के ऊपर बना हुआ है। और आपको बता दे इसे भारत का सबसे लंबा रेल ब्रिज माना जाता है। इसका दूसरा नाम एडप्पाली-वल्लारपदम पुल भी है।

केरल के कोच्चि में बने ‘वेंबनाद रेलवे पुल ’ की लम्बाई 4.62 KMऔर चौड़ाई महज 6 फीट ही है। यह ब्रिज केरल के दो क्षेत्र एडप्पाली और वल्लारपदम को आपस मे जोड़ने का कार्य करता हैं
इस पुल के निर्माण कार्य की शुरुआत जून 2007 में की गई थी, इस पुल को बनाने में करीब 4 वर्ष लग गए थे। 31 मार्च वर्ष 2010 में वेंबनाद रेलवे ब्रिज पूरी तरह से बन चुका था । वहीं 11 फरवरी, वर्ष 2011 में इसे पब्लिक के लिए खोल दिया गया था।

इस सबसे लंबे रेलवे ब्रिज वेंबनाद की सबसे बड़ी ख़ास बात यह है कि इसके नीचे से बड़े समुद्री जहाज भी आराम से गुजर सकते हैं। आपको जानकारी के लिए बता दें कि यह लाइन पूरी तरह से माल ढोने के लिए उपयोग मे लायी जाती है।

 

दीघा-सोनपुर रेल-सह-सड़क पुल – Digha Sonpur Bridge अगस्त 2015

दीघा-सोनपुर रेल-सह-सड़क पुल भारत की गंगा नदी पर बना सातवां सबसे लंबा ब्रिज है, इस ब्रिज को जे पी सेतु और लोकनायक जय प्रकाश नारायण ब्रिज के नाम से भी कहते है । यह विशाल पुल पटना और सोनपुर को आपस में जोड़ता है।

दीघा-सोनपुर रेल-सह-सड़क पुल की लम्बाई 4.5 KM(14,948 फीट) और चौड़ाई 33 फीट है।
बिहार में निर्माण हुए इस दीघा सोनपुर पुल का निर्माण कार्य वर्ष 2003 मे शुरू हुआ था, जिसे बनाने में करीब 13 वर्ष का लंबा समय लगा था, यह पुल अगस्त 2015 में पूरी तरह बनकर तैयार हो गया।

निर्माण कार्य के बाद इस पुल को 3 फरवरी 2016 में पब्लिक के लिए खोल दिया गया था। इस पुल को बनाने में करीब 1,570 करोड़ की धनराशि खर्च की गयी थी। इस पुल का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद मोदी जी ने किया था, र्स्वगीय पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी जी के द्धारा इस ब्रिज का शिलान्यास किया गया था।

आरा-छपरा सेतु – Ara Chapra Bridge 11 जून, 2017 | Longest Bridge In The India

आरा-छपरा सेतु, भारत की गंगा नदी पर बना आठवां सबसे लंबा विशाल पुल है। इस पुल का दूसरा नाम वीर कुँवर सिंह सेतु भी है। यह पुल बिहार में बना हुआ है जो वहा के भोजपुर जिले के बाबुरा और सारण जिले के डोरीगंज को आपस में जोड़ने का कार्य करता है।

इस पुल की लम्बाई 4.3 KM(14,270फीट) है। Ara Chapra Bridge की वजह से लोगों को काफी सुविधा हुई है, इसके बनने से आरा और छपरा की दूरी करीब 100 KM तक घट गई है।

आरा-छपरा सेतु को बनने में करीब 7 वर्ष का समय लग गया। इसको बनाने की शुरुआत वर्ष 2010 मे हुई थी, जो कि वर्ष 2017 में खत्म हुई इसे पूरी तरह बनकर तैयार कर दिया गया था।

आरा-छपरा सेतु को 11 जून, 2017 में आम लोगो के लिए खोल दिया गया था। इस पुल को बनाने में करीब 860 करोड़ रुपए की राशि खर्च की गयी थी ।

 

गोदावरी ब्रिज – Godavari Bridge वर्ष 2012 |  Longest Bridge In The India

भारत की गोदावदी नदी पर बने तीन पुलों में से यह एक पुल है। यह भारत का नौवां सबसे विशाल पुल है, जिसकी लम्बाई 4.13 KM(13,566 फीट) है। इस पुल का दूसरा नाम कोवुर-राजमुंदरी भी है।

गोदावरी नदी पर बना यह पुल कोव्वुर को पूर्वी गोदावरी जिले में दीवाचेरवु से राजामंड्री बाईपास एक्सप्रेस सड़क मे जोड़ देती है।

गोदावरी नदी पर बने इस पुल को बनाने का कार्य वर्ष 2009 मे शुरू हुआ था, जो कि वर्ष 2012 मे बनकर तैयार हो गया था, पर आम जनता के लिए इसे वर्ष 2015 में खोला गया था । गोदावरी ब्रिज को बनाने में करीब 800 करोड़ रुपए खर्च किये गए ।

 

मुंगेर गंगा सेतु – Munger Ganga Bridge अप्रैल वर्ष 2016

मुंगेर गंगा सेतु भारत में गंगा नदी पर बना हुआ भारत का दसवां सबसे लंबा विशाल पुल है ।आपको बता दे इस पुल की लंबाई 3.6 KMऔर चौड़ाई 12 मीटर है। मुंगेर गंगा सेतु दो शहर मुंगेर और जमालपुर को आपस में जोड़ता है।

मुंगेर गंगा सेतु का शिलान्यास र्स्वगीय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने वर्ष 2002 में किया था । मुंगेर गंगा सेतु बनने के बाद 12 मार्च, वर्ष 2016 में इस पुल में रेल मालगाड़ी की शुरुआत माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने की थी।

पर आपको बता दे यह पुल आम जनता के लिए 11 अप्रैल वर्ष 2016 को खोला गया था । इस पुल की अनेको खासियत यह पर जिनमे से एक यह है कि इसमें सड़क और रेल दोनों की सुविधा उपलब्ध करवाई गईं हैं, लेकिन कुछ कमियों की वजह से अभी सड़क सुविधा शुरु नहीं की जा सकी है कार्य जरी है ।

 

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