Indira Gandhi Death Story  Hindi

दोस्तों इस पोस्ट हम जानेगे Indira Gandhi Death Story  Hindi मे | और indira gandhi Ki Death Kaise Hui  Indira Gandhi Ko Kaise Mara Gaya Tha  इसमें मे आपको शहीद भाई Satwant Singh और शहीद  भाई  Beant  Singh की story बताऊंगा की असल मे हुआ क्या और कैसे थे –

Indira Gandhi Death Story  Hindi

सरदार Satwant Singh अगवान पिंड ( गाँव ) का रहने वाला एक नोजवान
लड़का था जो Indra Gandhi का बॉडी गार्ड था | जो 1981 मे भर्ती हुआ था |
पिता का नाम तरलोक सिंह और माता का नाम प्यार कौर है satwant singh
को भर्ती हुए अभी थोडा ही समय हुआ था और सरदार  Beant Singh एक इंस्पेक्टर था जो
चंडीगढ़ के पास मालवा पिंड का रहने वाला था |Beant Singh के पिता का नाम सरदार सुच्चा सिंह है |

Indira Gandhi Death Story  Hindi

दरबार साहिब पर इंदिरा गाँधी के हमले के बाद सरदार Beant singh बड़ा उदास रहता था |
उसे अन्दर ही अन्दर से यह चीज़े खाए जा रही थी | एक बार बेयंत सिंह अपने फूफा जी
जिनका नाम केहर सिंह था उनके पास बेठा था और कहने लगा जो भी हुआ है बहुत बुरा
हुआ है कई परिवार उजड़ गए है यहाँ तक छोटे छोटे बच्चो को भी मार दिया था , बहुत ही
बुरा लगता है सोच कर उनका क्या कसूर था |

फिर कहता है मेने इतिहास के पन्नो को पलट कर देखा है जो भी दरबार साहिब पर हमला करता है

या उसे अपमानित करता है उसे थोड़े समय बाद ही मौत मिल जाती है | आज तक जब भी ऐसा हुआ है

कोई न कोई योधा जरुर उठा है और उसने बदला लिया है इस चीज़ का |

Indira Gandhi Death Story  Hindi

दोस्तों यहाँ पर मे आपसे एक बात शेयर करना चाहूँगा ध्यान से पढना –

दोस्तों यह एक भ्रम बन रखा है अभी तक जितना मेने आज तक सुना है की  अगर कोई
दरबार साहिब अमृतसर पर हमला करता है तो 150 दिन के अन्दर उसे सजाये मौत मिल जाती है
पर ऐसा बिलकुल भी नहीं है इसका एक उधारण देना हु – अहमद शाह अब्दाली  ने
दरबार साहिब पर 1762 मे हमला किया था अपमानित  किया था पर उसकी मौत
1772 मे  हुई  अगर  दरबार साहिब  पर हमला करने वालो को 150 दिन के अन्दर
सजाये मौत मिल जाती है  तो अहमद शाह अब्दाली की मौत हमले के  10 साल बाद क्यों  हुई ?

दोस्तों ऐसे बहुत सारे मेसेज मेने व्हात्सप्प और फेसबुक पर पढ़े थे इसलिए इस पॉइंट
को टच किया मेने| यह एक गलत धारणा है जिसका वास्तविकता से कोई सम्बन्ध नहीं है| story की तरफ चलते है

Indira Gandhi Death Story  Hindi

बेयंत सिंह अपने फूफा केहर सिंह जी से पूछता है क्या अब भी कोई योधा आगे आयेगा
और इसका बदला लेगा ?उसके  फूफा जी कहते है अगर तेरे जेसा कोई गभरू
जवान उठे और बदला ले तब मुझे बहुत अच्छा लगेगा | बात किसी तीर की तरह दिल
को चीर गयी थी | सरदार बेयंत सिंह मन मे सोचने लगा की क्या मे यह काम कर
सकता हु , दो तीन दिन दिमाग मे यही चलता रहा | बेयंत सिंह ने सोचा की यह काम
मे अकेले नहीं कर सकता अगर थोड़ी सी भी चुक हो गयी तो मिशन अधुरा रहजायेगा |

अब सरदार बेयंत सिंह को तलाश थी एक साथी की जो उसकी तरह ईमानदार और
वफादार हो , खोज शुरु हो गयी बेयंत सिंह रोज सोचता की ऐसा बंदा को हो सकता है जो
इस काम मे मेरा साथ दे | सरदार सतवंत सिंह जो सरदार बेयंत सिंह के अंडर कमांड मे
काम करता था उसने उसे परखना चाहा

Indira Gandhi Death Story  Hindi 

बेयंत सिंह ने सरदार सतवंत सिंह से कहा जवान इस बार की दिवाली कहा मनानी है
दिल्ली मे रहकर या घर जाकर , आगे से जवाब आया जनाब कोनसी दिवाली यह
दिवाली तो सिक्खों की काली दिवाली है सब सिखो ने मिलकर फैसला किया है की
इस बार की दिवाली पर अँधेरा रखेगे और काले रंग की पगड़ी बांधेगे उस दिन |
तो काली दिवाली यहाँ रहकर मनाये या घर जाकर क्या फर्क पड़ता है | दिवाली तो
काली ही है ना हमारे लिए और फिर सतवंत सिंह ने कहा जनाब जो भी हुआ है बहुत
बुरा हुआ है यह बिलकुल नहीं होना चायिये था |हम इसकी सेवा करते है
( इंदिरा  गाँधी ) इसके पास रहते है पर इसने बहुत गलत किया| सरकार ने वफादारी नहीं की
हमारे साथ , और इतना कहते कहते आखे नम हो गयी

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सरदार बेयंत सिंह समज चुके थे की तीर निशाने पर जाकर लगा है | दर्द इसके अन्दर
भी बहुत जयादा है अन्दर से यह भी तड़फ रहा है  पर उन्होंने आज सारी बात नहीं खोली
क्योकि वह अभी थोडा और परखना चाहते थे |कुछ दिन बीत गए फिर बेयंत सिंह ने सतवंत
सिंह से कहा की तेरा दिल नहीं करता जो हुआ है गलत हुआ है हमे इसका बदला लेना चाहिए ,
थोडा सोचने के बाद सतवंत सिंह ने कहा जनाब करता तो है | पर हमे पहले अच्छे से विचार
करना होगा की यह काम होगा कैसे और कब होगा | समय बीतता गया दोनों रोज प्लानिंग
करते और इसके साथ साथ वह अब अच्छे दोस्त भी बन गए थे दोनों को एक दुसरे पर पूरा
विश्वास हो गया था की अब कोई गद्द्दारी  नहीं करेगा |

अब सरदार सतवंत सिंह , सरदार बेयंत सिंह और सरदार केहर सिंह तीनो मिल कर रोज
सलाह किया करते थे | प्लानिंग तेयार हो चुकी थी और कुछ होने वाली थी |

indira gandhi Ki Death Kaise Hui

एक दिन सतवंत सिंह ने कहा की हमे हरमंदिर साहिब पर हमले की जो भी खबरे मिली है
वह टीवी न्यूज़ चैनल और रेडियो के माध्यम से मिली है क्यों ना हम एक बार
खुद वहा जाके देख कर आये |की कितना नुक्सान हुआ  है और अब केसा है वहा |

20 ओक्टुबर को सरदार केहर सिंह सरदार बेयंत सिंह और सरदार सतवंत सिंह
तीनो अमृतसर गए  और  गुरूद्वारे के अन्दर गए | अपनी आखो से वहा का नजारा
देखा| आखे वहा पर हुआ अत्याचार देख नहीं पाई आखो से आसू निकलने लगे जुबान
से कुछ नहीं निकल पाया आखे ही सब बयान कर रही थी की उन्हें वहा का नजारा
देख कर कितना बुरा लग रहा था |

Indira Gandhi Death Story  Hindi

मुह से कुछ नहीं बोल पाए बस हाथ जोड़ कर गुरु के आगे अरदास की ” गुरु जी किरपा
करना हम पर जो काम हम पूरा करना चाहते है वह पूरा करवाना इतनी हिम्मत
देना की मौत का डर अन्दर से निकल जाये ” अरदास परवान होने वाली थी पर ये उनको नहीं पता था शायद

वहा से फिर तीनो अपने अपने घर चले गए सरदार केहर सिंह जो मुस्तफाबाद के रहने वाले थे
वो वहा गए और सरदार सतवंत सिंह और बेयंत सिंह अगवान और मालवा चले गए |

दो दिन घर पर रहे | यहाँ पर मे आपको एक बात बता दू जो सरदार सतवंत सिंह थे वह
मौने ( जिनके बाल कटे हुए होते है ) थे | अपने पिता से कहते है पिता जी मे एक
जरुरी परीक्षा देने जा रहा हु मेरे लिए वाहेगुरु से अरदास करना ,पिता कहते है बेटा
अरदास तो मे कर दूंगा पर तू खुद ही गुरु का सच्चा सिख क्यों नहीं बन जाता , बाते तो
बहुत करता है गुरु की, पर उनका सच्चा सिख नहीं है , जो गुरु के सच्चे सिख होते है

 Indira Gandhi Ko Kaise Mara Gaya Tha

ना उन्हें किसी भी काम से पहले अरदास करवाने की जरूरत नहीं पड़ती वाहेगुरु
खुद ही उनके सारे काम करवाता है , उनके पिता की यह बात दिल पर लग गयी और
सतवंत सिंह सोचने लगे की मे इतना बड़ा काम करने जा रहा हु और मे गुरु का
सच्चा सिख नहीं हु अभी तक तो गुरु का आशीर्वाद मुझे केसे मिलेगा | बात दिमाग मे
बैठ गयी इसलिए पहले उन्होंने अमृत शका और उसके बाद दिल्ली के लिए घर से
निकल गए | पिता ने अरदास करदी पर उन्हें क्या पता था की उनका पुत्र किस परीक्षा की बात कर रहा है |

Indira Gandhi Death Story  Hindi

वह सब दिल्ली पहुच चुके थे अब उन्हें तलाश थी एक सही मौके की जो उन्हें 31 ओक्टुबर
को मिला 31 ओक्टुबर का दिन आ गया था ,सुबह का समय था ,

दोस्तों आपको यहाँ पर मे एक बात बताना चाहूँगा जो बहुत कम लोग जानते है ,
इंदिरा गांधी ने अपनी दो हमशकल रखी हुई थी क्योकि जहा पर वो खुद जाना नहीं
चाहती थी या नहीं जा सकती थी | वहा अपनी हमशकल को भेज दिया करती थी |
और इंदिरा गांधी अपना रूप , वेश भूषा बदलने मे एक्सपर्ट थी |

नोट – यह जानकारी ऑनलाइन मीडिया और सिख प्रचारको की कहानियों से ली गयी है उनके हिसाब से ऐसा था |

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Indira Gandhi Death Story , Hindi indira gandhi Ki Death Kaise Hui

R K Dhawan जो इंदिरा गांधी के सहयोगी थे जो उनके काफी नजदीक भी थे
, जो उनकी जयादातर मीटिंग्स फिक्स किया करते थे | वह हमेशा असली वाली इंदिरा
गांधी के साथ ही रहा करते थे |इंदिरा गांधी को उस दिन किसी विदेशी लोगो के साथ
मिलने जाना था उनकी मीटिंग फिक्स थी ,सरदार केहर सिंह को यह बात कही से पता
चल गयी थी और उन्हें यह भी पता था की अगर इंदिरा गांधी के साथ R K Dhawan  हुआ तो
वह असली इंदिरा गांधी ही होगी | सरदार बेयंत सिंह , सरदार सतवंत सिंह अपनी पूरी प्लानिंग
और तेयारी करके बेठे थे बस इन्तजार था तो इंदिरा गांधी का बाहर आने का ,

बेयंत सिंह एक इंस्पेक्टर था जिसकी वजह से वह  आगे खड़ा हुआ करता था और वह
गेट खोला करता था इंदिरा गांधी के लिए , उसी पंक्ति मे सतवंत सिंह खड़ा हुआ
करता था पर वह काफी दूर खड़ा हुआ करता था क्योकि वह एक सिंपल सा सिपाही था |

Indira Gandhi Death Story  Hindi

पर उस दिन सतवंत सिंह ने सबको झूट बोला की उसका पेट खराब है तो उसे
बाथरूम के पास खड़ा कर दिया जाये | बेयंत सिंह जहा खड़ा होता था उसके पास ही
बाथरूम  भी था |जहा पर सारे सिपाही फ्रेस्श होने के लिए उसे यूज़ किया करते थे|

सतवंत सिंह भी अब बेयंत सिंह के लगभग पास ही खड़ा था और वह अपने साथियों को
दिखाने के लिए सुभाह से 3 से 4 बार बाथरूम भी जा चूका था ताकि किसी को
कोई भी शक ना हो उस पर |

Indira Gandhi Death Story Hindi , Indira Gandhi Ko Kaise Mara Gaya Tha

इंदिरा गांधी 9 बजे बाहर आती है कई लोग लिखते है की उस दिन उन्होंने नारंगी रंग
की साडी पहनी हुई थी |आगे बेयंत सिंह खड़ा था और उसी लाइन मे थोड़ी सी दूर
ही सतवंत सिंह भी खड़ा था |इंदिरा गांधी बेयंत सिंह के पास पहुचती है और बेयंत सिंह
उन्हें स्ल्युट मरता है और वह सल्युट  मारने के बाद अपना हाथ गेट की तरफ
लेजाने से पहले अपनी पिस्तौल पर लेजाकर उसे बाहर निकलाता है और इंदिरा गांधी पर
एक फायर करता है , गोली इंदिरा गांधी के पेट पर लगती है |
गोली लगते ही इंदिरा गाँधी के मुह से निकलता है बेयंत सिंह ये क्या ?

सरदार ललकार कर कहता है इंदिरा गांधी हरमंदिर साहिब का बदला , और बेयंत सिंह
इतना बोलते ही 4 गोलिया और इंदिरा गाँधी के सीने मे उतार देता है , इंदिरा
गाँधी वही गिर चुकी थी अभी कुछ सेकंड्स भी नहीं बीते थे की सरदार सतवंत सिंह
बिजली की तेजी से दोड़ते हुए वहा पहुचता है और अपनी मगज़िन मे रखी 28 की

Indira Gandhi Death Story  Hindi ,1984 story in hindi

28 गोलिया इंदिरा गाँधी के सीने मे उतार देता है , ताकि अब उसके बचने के सारे चांस
ही खतम हो जाये | दोनों सरदार हथियार फेक देते है चुप चाप हाथ ऊपर करके
खड़े हो जाते है और जकारा छोड़ते है ” बोले सो निहाल सत्श्रीअकाल ”
सब तरफ अफरातफरी मच जाती है कुछ ही सेकंड्स के अन्दर दोनों को ग्रिफ्तार कर
लिया जाता है | और उन्हें एक कमरे मे लेजाकर बिठा दिया जाता है और उन्ह्से

इसकी वजह पूछने के साथ साथ मारा जा रहा होता है | सरदार बेयंत सिंह बोल रहे
होते है हमारी तुमाहरे साथ कोई दुश्मनी नहीं है तुम हमे जितना मर्ज़ी मार लो अब ,
हमने जो करना था हमने कर लिया है अब तो मौत भी मिल जाये तो कोई दुःख नहीं ,
और सरदार बेयंत सिंह इस हमले की सारी जिमेदारी खुद पर ले रहा होता है |

To Be  Continued………..Indira Gandhi Death Story Hindi

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दोस्तों कहानी अभी भी बहुत लम्बी है अगर आप मुझे कमेंट करेगे की मे आगे की भी कहानी लिखू तो मे आगे की कहानी भी जरुर लिखुगा | घन्यवाद ..
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