बूढी माँ | Hindi Story With Moral | एक प्रेरणादायक कहानी

Hindi Story With Moral

Hindi Story With Moral Prernadayak Kahaniya –नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है सिंहफैक्टडॉटकॉम  पर  यह एक Stories With Moral In Hindi कहानी है  हम उमींद करते है ( Prernadayak Kahani ) आपको बहुत पसंद आयेगी |

दोस्तों यह बात तो आपने कई बार सुनी ही होगी की जेसी करनी वैसी भरनी ये सब बाते हम बचपन से पढ़ते और सुनते आ रहे है आज इस कहानी मै भी कुछ ऐसा ही होने वाला है जानने के लिए चलते है कहानी की तरफ Hindi Story With Moral | बूढी माँ

 

बूढी माँ | Hindi Story With Moral | एक Prernadayak Kahani

माता जी अपने जिन्दगी के आखरी पड़ाव मै थी  शरीर कमजोर हो चूका था खाना खाते समय हाथ कापते थे तबियत भी खराब रहने लगी थी| उनका बेटा शहर मै नोकरी करता था और अपनी पत्नी और एक बच्चे के साथ शहर मै ही रहता था| जब बेटे को पता चला को माँ बीमार है तो बेटा अपनी माँ को भी अपने साथ शहर ले आया क्योकि वह अंतिम समय मै अपनी माँ की सेवा करना चाहता था|

शहर आने के बाद बूढी माता के कमजोर होने के कारण हर रोज उनसे कोई ना कोई समान नीचे गिर कर टूट जाया करता  यहाँ तक की  जिस बर्तन मै उन्हें खाना दिया जाता वह भी टूट जाते क्योकि उनका शरीर बहुत कमजोर हो चूका था | माता जी की बहु अपने पति को इस बात के लिए रोज तंज कसा करती की आज फिर बरतन टूट गए अब मै रोज रोज नए बर्तनों का नुक्सान नहीं करवा सकती |

रोज रोज की बातो से तंग आकर बूढी माता के पुत्र ने एक लकडी  का कटोरा लाकर अपनी पत्नी को दे दिया और कहा अब से हर रोज माँ को इसी बर्तन  मै खाना देना यह टूटेगा नहीं |

lakdi ka katora image

क्योकि पुत्र और उसकी पत्नी अब अपनी माँ से दुखी हो चुके थे वह उनके साथ बुरा व्यवहार करने लगे थे |

बूढी माँ | Hindi Story With Moral | एक  Prernadayak Kahani

जहा पहले माता जी सब के साथ बैठ कर खाना खाती थी पर अब उन्हें अकेले एक जगह पर बैठा दिया जाता और उस लकड़ी के कटोरे मै खाना परोसा जाता | वह बड़ी मुश्किल से खाना खा पाती कुछ खाना उनके मुह मै जाता तो कुछ जमीन पर गिरता  पर उनके  पुत्र और बहु को यह  सब दिखाई नहीं देता था  पर उस बूढी माता के पुत्र का वह छोटा सा पुत्र जो अभी 6 साल की उम्र का था |

वह अपनी दादी को हमेशा देखता रहता और अपनी दादी जी से हमेशा उस लकड़ी के कटोरे के बारे मै पूछता रहता |उसकी  दादी हमेशा बोलती की अब मै बूढी हो चुकी हु इसलिए मुझे इस लकड़ी के कटोरे मै खाना खाना पड़ता है |

एक दिन जब सब लोग खाना खा रहे थे तब वह छोटा सा बच्चा अपना खाना छोड़कर  कुछ लकडियो को लेकर आया और जमीन पर बैठ गया और कुछ करने लगा|

माता पिता ने पूछा बेटा तुम अपना खाना छोड़कर यह क्या कर रहे हो खाना क्यों नहीं खा रहे उस छोटे से लड़के  ने जवाब दिया – मै आप लोगो के लिए लकड़ी का कटोरा बना रहा हु क्योकि जब आप बूढ़े हो जाओगे तो मै आपको इसी कटोरे मै खाना दिया करुगा |

अपने पुत्र के मुह से यह बात सुनकर दोनों को बहुत अधिक धक्का लगा दोनों की आखो से आंसू निकलने लगे  दोनों को अपनी गलती का एहसास हो गया था वह दोनों तुरंत अपना खाना छोड़कर अपनी बूढी माँ के पास गए और उनसे जाके माफ़ी मांगने लगे   और अब वह अपनी बूढी माता को अपने हाथो से अपने साथ बिठा कर खाना खिलाने लगे और दिल से उनकी सेवा करने लगे |

  • कहानी से सीख  –

मित्रो  इस कहानी से हमे एक बहुत अच्छी सीख मिलती है की हमे अपने माता पिता का आदर करना चाहिए क्योकि यह तो हम सब अच्छे से जानते और समझते है की जैसा बीज बोओगे वैसा ही फल पाओगे अगर उनके साथ बुरा वयवहार करोगे तो समय आने पर तुम्हारे साथ भी ऐसा हो सकता है .

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