Hemkund Sahib History Hindi

Sri Hemkund Sahib History Hindi :- दोस्तों इस पोस्ट मे हम आपको  हेमकुंड साहिब के बारे मे जानकारी देंगे और हेमकुंडसाहिब

से जुडी हुई कुछ रोचक बाते भी बतायेगे sri hemkund sahib History hindi ,

Gurudwara Sri Hemkund Sahib History Hindi

Hemkund Sahib History Hindi
गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब

दसम गुरु गुरु गोबिंद सिंह जी ने दसम ग्रंथ के अंश विचित्र नाटक मे अपनी आत्म कथा

उलेख किया है गुरु जी ने बातया था की उन्होंने अपने पुर्वजनम मे कैसे तपस्या की थी

और वह जगह पर किस प्रकार की है  गुरु गोबिंद सिंह जी उलेख किया है की उन्होंने

पुर्वजनम मे एक सरोवर के तट पर भक्ति की थी जो की चारो और से 7 पहाडियों से घिरा

हुआ है जिसका नाम हेमकुंड साहिब है ,हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा सिखो के प्रमुख गुरुद्वारों

मे से एक माना जाता है क्योकि इस जगह पर गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पूर्वजन्म मे ध्यान

साधना की थी और वर्तमान मे जीवन पाया था |

Hemkund Sahib History Hindi

हेमकुंड साहिब का उलेख गुरु गोबिंद सिंह जी की आत्म कथा मे होने के बावजूद इस जगह

को धुंडने मे करीब 200 साल लग गए |

हेमकुंड साहिब पर्वत सात चोटियों से घिरा हुआ हिमालय पर स्थित है जिसकी उचाई 4632 मीटर है

हेमकुंड साहिब गुरूद्वारे के बिलकुल निकट लक्ष्मण जी का मंदिर भी है जहा पर बद्री नाथ

जाने वाले कई यात्री इस जगह पर पहुच कर हेमकुंड साहिब और लक्ष्मण मंदिर के दर्शन करके जाते है |

Gurudwara Sri Hemkund Sahib History Hindi

7 चोटियों से घिरे हेमकुंड साहिब की प्रत्येक चोटी पर केसरिया रंग निशान साहिब

झूलते है हेमकुंड साहिब की खोज के बाद उन सात चोटियों पर चड़ने वाले संत सूरत

सिंह जी थे जिन्होंने गुरु की किरपा से वहा चढाई की और दुनिया को दिखाया की अगर

मन मे गुरु के लिए सची भक्ति और आस्था हो तो कुछ भी असंभव नहीं है | हालाँकि

उस समय उन चोटियों पर चड़ना बहुत मुश्किल काम था क्योकि सब चोटिया सीधी

दिवार की तरह खड़ी और जटिल है |

Hemkund sahib Ki Khoj Kab Or Kisne Ki (Gurudwara Sri Hemkund Sahib History Hindi)
Hemkund Sahib History Hindi
Gurudwara Sri Hemkund Sahib  Trek Pic

श्री हेमकुंड साहिब की खोज जुलाई 1936 मे संत सोहन सिंह और हवलदार मोहन

सिंह जी ने की थी | दोनों अलग अ लग पहाडियों पर जाकर गुरु की उस पावन जगह को

ढूंडा करते थे |अनेको पहाडियों को पार करते हुए पैदल चलते हुए जंगली जानवरों का

सामना करते हुए संत सोहन सिंह जी उस पवित्र जगह पर पहुच जाते है जो की गुरु गोबिंद

सिंह द्वारा उलेखित विचित्र नाटक की उस जगह से मेल खाती है | उस जगह पर पहुच कर

संत जी ने पावन कुंड मे स्नानं किया और बिचित्र नाटक कि उस बाणी को पढने लगे जो गुरु गोबिंद सिंह

जी ने लिखी थी , पर तबी उनके दिल मे शंका हुई की क्या वह सच मे सही जगह पर है क्या यह

ही वही जगह है क्योकि हिमालय पर्वत पर तो और भी ऐसी बहुत सारी जगह हो सकती है ,

उन्होंने अपनी आखे बंद की और वाहेगुरु से अरदास की – आप मुझे इस पावन जगह पर तो

ले आये है अब आप ही मुझे बताइए की क्या यह वही जगह है और आप किस जगह पर बैठ

कर ध्यान साधना मे लीन रहे थे | आखे अभी खुली ही थी की पीछे से एक आवाज उनके कानो

मे पड़ती है की खालसा जी आप क्या ढूंड रहे है ? संत जी ने पीछे मुड के देखा तो वहा एक ऋषि

थे वह गुरु ही थे जो की ऋषि का रूप धारण कर संत सोहन सिंह जी को सही रास्ता दिखाने आये थे |

Gurudwara Sri Hemkund Sahib Story Hindi

संत सोहन सिंह जी कहते है की मे उस जगह को ढूंड रहा हु जहा गुरु गोबिंद सिंह जी ने बेठ कर

ध्यान साधना की है | गुरु ने कहा जिस स्थान को आप तलाश कर रहे है यह स्थान यही है और इस

शिला पर बेठ कर गुरु ने भक्ति की थी , इतना सुनते ही संत सोहन सिंह जी उस तपो शिला से लिपट

कर रोने लगते है , गुरु के लिए सारा प्यार आँखों से बाहर आने लागता है जब उनकी आखे खुलती है|

तो वहा उनके आस पास कोई नहीं होता| संत सोहन सिंह जी उस जगह पर माथा टेकते है और गुरु से

अरदास करते है की वह जल्दी यहाँ आकर गुरूद्वारे का निर्माण करेगे और थोड़े ही दिनों मे वह अपने

कुछ साथियों के साथ वहा पहुच कर उस जगह एक छोटे से गुरूद्वारे और लक्ष्मण मंदिर का निर्माण करवाते है

Gurudwara Sri Hemkund Sahib History Hindi
Hemkund Sahib Yatra Hindi (गोबिंद घाट से हेमकुंड की पैदल यात्रा के बारे मे )
Hemkund Sahib History Hindi
 रास्ते का  एक द्रश्य 

गोबिंद घाट से हेमकुंड साहिब की यात्रा पैदल ,खचरो द्वारा पूरी की जाती है गोबिंद घाट से

गोबिंद धाम तक पहले दिन जाया जाता है जिसमे संगत (लोगो )को करीब 14 km पैदल

यात्रा करनी होती है | संगत गोबिंद धाम पहुचकर विश्राम करती है , एक रात गोविन्दधाम

गुरुद्वारे मे विश्राम करने के बाद सांगतो का जथा सुबह 4 बजे से ही हेमकुंडसाहिब पर्वत  की

चढाई करना शुरू कर देते है और 6 km की कठिन चढाई के बाद थके हारे गुरु के दर्शन करते है

जिन्हें देख कर सारी थकान दूर हो जाती है वहा पर शरीर मे एक अद्भुत शक्ति का संचार महसूस

किया जा सकता है | संगत वहा पहुच कर पहले  हेमकुंड( यानि बर्फ से जमा एक कुंड )  मे स्नान करते

है और फिर नहा धो कर गुरूद्वारे के अन्दर माथा टेकते है|और बाणी और कीर्तन का आनंद लेते है  |

ठण्ड से बचने के लिए वहा आपको कम्बल मिल जायेगे जिसे ओढ़ कर आप कुछ हद तक खुद को

ठण्ड से बचा सकते है | लंगर खाने के लिए वहा पर गरमा गरम खिचड़ी बिस्कुट और चाय का आप आनंद ले सकते है |

ज्यादा जानकारी के लिए यह विडियो देखे

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सतश्रीअकाल दोस्तों मेरा नाम हरप्रीत सिंह है | सिंह फैक्ट डॉट काम मै आपका स्वागत है यहाँ पर आपको पढने के लिए मिलेगे रियल फैक्ट्स एंड स्टोरीज इन हिंदी मै और पंजाबी स्टेटस और शायरी , बस आप लोगो के प्यार और सपोर्ट की जरूरत है वह देते रहिये

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