Guru Ram Das Ji story Hindi

Sri Guru Ram Das Ji Story Hindi :- दोस्तों इस पोस्ट मे आपको Sri Guru Ram Das Ji History Hindi मे जानने के लिए मिलेगी और आप यह भी जान पायेगे की Sri Guru Ram Das Ji Kon the और अंतिम समय मे sri Guru Ram Das ji Jyoti Jot Kaise Samaye मतलब Sri Guru Ram Das ji Death Story In Hindi यह सब बाते जानने के लिए इस पोस्ट को पूरा पढ़े

Sri Guru Ram Das Ji (श्री गुरु राम दास जी)

( 9 अक्टूबर 1534 – 16 सितम्बर1581)

Sri Guru Ram Das Ji story Hindi

Sri Guru Ram Das Ji story Hindi-श्री गुरु राम दास जी (जेठा जी ) का जन्म 9
अक्टूबर 1534 को चूना मंडी जो अब लाहौर में है हुआ था|चोथे  गुरु रामदास  जी
का बचपन का नाम जेठा जी था |जेठा जी के पिता भाई हरी दास जी और माता अनूप
देवी जी थे | जब जेठा जी 7 वर्ष के हुए तो उनके माता पिता का देहांत हो गया था |

जिसके बाद वो अपनी नानी माँ के साथ रहने लगे |जब जेठा जी 12 वर्ष के थे
तब एक बार श्री गुरु अमर दास जी   से मिले थे |मिलने के बाद गुरु अमर  दास जी
को जेठा जी के साथ गहरा लगाव हो गया |तभी जेठा जी अपनी नानी माँ के साथ
गोइन्दवाल साहिब रहने आ गये |12 वर्ष की आयु में उनकी रूचि धार्मिक कार्यो में बढने  लगी |

Sri Guru Ram Das Ji story Hindi

जेठा जी गुरु अमर दास जी के साथ धार्मिक कार्यो मै भाग लेने लगे |उनके अन्दर
अत्यधिक सेवा भाव जाग चूका था |गुरु की सेवा और  धार्मिक कार्य करते हुए वेह बड़े
हुए |जेठा जी ने गोइन्दवाल साहिब के निर्माण की सेवा की |

श्री गुरु राम दास जी का विवाह बीबी भानो जी के साथ हुआ |बीबी भानो जी श्री गुरु अमर
दास जी की  पुत्री थी |गुरु राम दास जी के 3 पुत्र हुए जिनका नाम (प्रथ्वी चंद जी ,महादेव जी ,अर्जन देव जी )
रखा गया |विवाह के उपरांत गुरु राम दास जी और बीबी भानो जी गुरु अमर दास जी के
साथ ही रहते हुए लंगर घर की सेवा करते थे |(Sri Guru Ram Das Ji story Hindi)

गुरु राम दास जी हमेशा गुरु अमर दास जी के साथ रह कर दूर दूर भारत में धर्म का प्रचार करते और अज्ञानता को मिटाते थे |उनकी इस भक्ति भाव को देख कर श्री गुरु अमर दास जी ने 1 सितम्बर 1574 को गुरु की उपाधि जेठा जी को दी और उनका नाम बदल कर गुरु राम दास जी रखा |

कुछ अन्य कहानिया

Sri Guru Ram Das Ji History In Hindi

गुरु की उपाधि मिलने के बाद गुरु राम दास जी ने ‘रामदासपुर’ की नींव रखी जो
कि बाद में अमृतसर के नाम से जाने जाना लगा |गुरु राम दास जी ने अमृतसर
सरोवर का निर्माण करवाया| इस कार्य की देख रेख करने के लिए भाई सहलो जी
एवं बाबा बूढा जी ने उनका पूरा साथ दिया |

कुछ ही समय में ”चक रामदास पुर”  व्यापार की दर्ष्टि से चमकने  लगा|
श्री गुरू रामदास साहिब जी ने स्वयं अलग अलग  व्यापारों से सम्बन्धित व्यापारियों
और लोगो को इस शहर में आमंत्रित किया |उनका यह कदम इस शहर को नयी
उचाई पर ले गया |सिख लोग यहाँ आकर बसने लगे |

Forth guru Nanak Story in Hindi

श्री गुरु राम दास जी ने सिख धर्म के लोगो के विवाह के लिए आनंद कारज 4 फेरे
(लावा )की रचना की और सभी सिखो को उनका पालन और गुरमत  मर्यादा के बारे
में बतया |इस प्रकार श्री गुरु राम दास जी ने सिख धर्म के लिए एक नयी विवाह
प्रणाली को प्रचलित किया |(Sri Guru Ram Das Ji story Hindi)

गुरु राम दास जी ने अपने गुरूओं द्वारा दी गयी  गुरू का लंगर प्रथा को आगे बढाया|
उन्होंने अन्धविश्वास, कुरीतियों का पुरजोर विरोध कर ज्ञान और धर्म का पाठ पढाया|

श्री गुरु राम दास जी ने 30 रागों में 638 शबद् लिखे जिनमें 246 पौउड़ी, 136 श्लोक,
31 अष्टपदी और 8 वारां हैं जो श्री  गुरू ग्रन्थ साहिब जी में अंकित  है|

श्री गुरु राम दास जी  ज्योति जोत -Sri Guru Ram Das ji Jyoti Jot Kaise Samaye

Sri Guru Ram Das ji Death Story In Hindi

श्री गुरु राम दास जी ने ज्योति जोत समाने से पहले गुरुगदी (गुरुपद )अपने सबसे छोटे

बेटे श्री गुरु अर्जन साहिब  जी को दिया |श्री गुरु राम दास जी ने 16 सितम्बर1581  को जयोति जोत समायी |

यह भी पढ़े

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