Guru Nanak Dev ji ( गुरु नानक देव जी की सारी कहानिया )

Guru Nanak Dev ji

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Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi

Guru Nanak Dev ji
Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi

Kohri Ka ilaaj (Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi )

एक दिन गुरु नानक देव जी और भाई मरदाना जी भ्रमण करते करते तहसील

दीपालपुर के एक गाँव मे पहुचे , बारिश का समय था बहुत तेज बारिश हो रही थी |
भाई मरदाना जी ने गुरु जी से कहा की अगर आप आज्ञा दो तो मे इस गाँव मे रह रहे
लोगो से पूछता हु अगर हमे एक रात रुकने के लिए यहाँ कोई जगह मिल जाये तो
नानक जी ने कहा ठीक है आप पूछ लीजिये , भाई मरदाना जी गुरु जी की आज्ञा
लेकर गाँव मे जाकर सबसे पूछते है पर कोई उन्हें वहा रुकने की जगह नहीं देता है |

बारिश का समय था इसलिए वहा रुकने के लिए जगह आवश्यक थी अगर बारिश ना
होती तो गुरु जी और मरदाना जी और दिनों की तरह जंगल मे सोकर रात बिता लेते |
जब मरदाना जी गाँव से वापिस आ रहे थे तो उन्हें एक छोटी सी कुटिया दिखाई दी जहा
एक दीया जल रहा था | मरदाना जी और गुरु जी उस झोपडी की तरफ चल देते है |

Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi

उस झोपडी मे एक आदमी रहता था जो की कोहडी था ( कोहड़ की बीमारी से गर्सित ) उस
वयक्ति को उसके घर वालो ने घर से बाहर निकाल दिया था| क्योकि उन्हें लगता था की यह
कभी ना मिटने वाला रोग है और अगर वह व्यक्ति सबके साथ रहेगा तो यह बीमारी पुरे गाँव
मे फ़ैल जाएगी| उस व्यक्ति के घरवाले उसे सुबह और शाम का खाना उसकी झोपडी मे ही दे
जाते थे | इसलिए वह व्यक्ति अकेला वहा रहकर अपना जीवन यापन करता था|

गुरु जी और मरदाना जी को अपनी झोपडी मे प्रवेश करता देख उस कोडी ने कहा की मेरे पास
मत आना मे कोड का मरीज हु अगर आप मेरे पास आये तो यह बीमारी आपको भी लग जाएगी |
पर गुरु जी ने उसकी एक ना सुनी और उसके पास जाकर बेठ गए | वह व्यक्ति के बहुत मना करने
के बाद भी , तब गुरु जी ने वहा बैठ कर कुछ सब्दो का उचारण किया जिनका मतलब यहाँ था

Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi

भागवान ने हमे यह शरीर दुसरो की मदद करने जरूरत मंदों की सेवा करने और भगवान् की
भक्ति करने के लिए दिया है अगर हम इस शरीर का सही से प्रयोग नहीं करेगे तो यह अनेको
बीमारियों से ग्रसित हो जायेगा , ऐसे ही गुरु जी पूरी रात उपदेश देते रहे और वह व्यक्ति उनकी
बातो को सुनता रहा गुरु नानक देव जी की बातो का उस व्यक्ति पर इतना असर हुआ की वह

व्यक्ति सुबह खुद ही उठ गया और चलने फिरने लगा ,उसकी आधी से ज्यादा बीमारी गुरु जी के
उपदेशो से ही खतम हो गयी थी , गुरु जी कुछ दिन उस व्यक्ति के साथ ही रहे और उसका इलाज
करते रहे जब वह व्यक्ति पूरी तरह ठीक हो गया तो उसने अपने गाव जाकर सबको गुरु नानक जी

के बारे मे और उनके इस चमत्कार के बारे मे बताया , सब लोग उस वयक्ति की बाते सुनकर गुरु जी
के पास आ गए और अपने इस व्यवाहर के लिए उनसे माफ़ी मांगी , तब गुरु जी ने सबको कहा की
हमे सबकी मदद करनी चाहिए , सब उस खुदा के बन्दे है | हमे निस्वार्थ सेवा करनी चाहिए | किसी से
घर्णा नहीं करनी चाइये |

अगर आपने अभी तक गुरु नानक देव जी के बारे मे नहीं पढ़ा है तो यहाँ पढ़े

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Sachhi Namaaz (Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi )

Sachhi Namaaz Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi

एक दिन गुरु जी नदी मे स्नान करने गए उनके साथ भाई मरदाना जी भी थे |
गुरु जी स्नान करने के लिए नदी मे उतर गए काफी देर तक वापिस ना आने पर
भाई मरदाना जी ने उन्हें काफी ढूंडा पर वह नहीं मिले काफी देर बाद भी ना मिलने
पर मरदाना जी वापिस आ गए और सारी बात शहर के नवाब दोलत खां को बताई ,

यह सुनते है नवाब ने अपने आदमियों को उन्हें धुंडने के लिए भेजा | इस घटना के 3
दिन बाद पता चला की गुरूजी कब्रिस्थान मे बेठे हुए है जब नवाब को यह पता चला तो
वह सीधा कब्रिस्थान पहुच गया उनके साथ शहर का बड़े काजी जी भी उनके साथ वहा
पहुच गए | गुरु नानक देव जी ने कहा इस कब्रिस्थान मे ना कोई हिन्दू है ना कोई मुसलमान

Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi

यहाँ सब इंसान है | यह सुन कर नवाब ने कहा की अगर ना कोई हिन्दू है ना कोई मुसलमान
तो आप हमारे साथ नवाज अदा क्यों नहीं करते आप तो अगर आप ना हिन्दू है ना मुसलमान
तो आप कुछ भी कर सकते है गुरु जी ने कहा ठीक है आज हम आपके साथ नवाज अदा करेगे |

नवाज के समय नवाब दोलत खां और क़ाज़ी जी नवाज अदा करने लगते है पर गुरु नानक जी
पास मे खड़े होकर उन्हें देख रहे होते है , नवाज खत्म होने के बाद गुरु नवाब और क़ाज़ी गुरु
जी से पूछते है आपने नवाज अदा क्यों नहीं की |

गुरु जी नवाब से कहते है किसके साथ करता नवाज के समय तो आपका ध्यान कंधार मे घोड़े
खरीदने पर लगा था और क़ाज़ी जी का ध्यान उनके घर मे आज ही पैदा हुए घोड़ी के बच्चे पर था ,
आप दोनों का बस शरीर यहाँ पर था पर आपका मन दुनियावी कर्म कांड मे लगा हुआ था |

Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi

यह सुनकर नवाब और क़ाज़ी दोनों को नानक की बातो पर यकीन हो गया , गुरु नानक ने कहा उस खुदा की
सच्ची नवाज वह है जो पुरे दिल और ईमान से की जाती है , अगर उस खुदा को याद करते समय
भी आपका ध्यान उस खुदा पर नहीं है तो आप उस खुदा को याद करने का देखावा कर रहे हो , जो
की सही नहीं है खुदा के दर पर वह नवाज परवान होती है जो तन मन को एकाग्र करके की जाती है ,
अगर आप ऐसा नहीं कर पाते तो आप खुद को धोका दे रहे होते हो ….

Guru Nanak Stories Hindi

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गुरु नानक देव जी की बगदाद की कहानी (Guru nanak dev Ji Baghdad story In Hindi )

 Guru Nanak in Baghdad  (Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi)

गुरु नानक देव जी मक्का , मदीना से होते हुए बगदाद पहुचे वहा पर उन्होंने
मुसलमानों का यह भ्रम तोडा की संगीत हराम होता है और खुदा की बंदगी मे
संगीत का कोई स्थान नहीं होना चाहिए

शहर के बाहर गुरु जी ने एक स्थान पर बैठ कर खुदा का कीर्तन गीत गाने शुरू
कर दिए और उन्हें सुनने के लिए वहा के कई स्थानीय निवासी आने लगे
यह बात जब उस शहर के बड़े मोलाना और काजियो के पास पहुची तो वह अपने
साथियों के साथ वहा पर आ पहुचे क्योकि वह नहीं चाहते थे की उनके मुसलमान
शहर मे कोई खुदा की बंदगी गाना गा कर करे वह इन चीजों को हराम मानते थे

वह उस जगह पर आ पहुचे और उनके हाथो मे पत्थर और डंडे थे पर उनके पत्थर और
डंडे उनके हाथो से वही गिर गए जब उन्होंने गुरु नानक देव जी की मधुर आवाज मे खुदा की बंदगी सुनी
गुरु जी के चेहरे पर इतना तेज और निर्भयता देख वह खड़े के खड़े रह गए , अब सब
लोग गुरु जी के पास बैठकर उनके कीर्तन गीतों को सुनने लगे और झुमने लगे , उन्हें
ऐसा प्रतीत हो रहा था की जैसे खुदा साक्षात् उनके सामने बैठ कर खुद के ही भजन गा रहा है

यहाँ पर गुरु जी की पीर दसत गीर और शेख बेहलोन के साथ धरम चर्चा हुई | गुरु जी
ने उन्हें ज्ञान दिया की अगर संगीत का उस खुदा की बंदगी मे सही ढंग से प्रयोग किया
जाये तो वह हराम नहीं मना जायेगा और इसी जगह पर बैठ कर गुरु जी ने कहा था की
हम यहाँ अकेले नहीं है हमारे जेसे अनेको गृह आकाश पताल और ब्रमांड
मोजूद है जो उस खुदा ने बनाये है , गुरु जी ने बगदाद के लोगो को यह ज्ञान का पाठ पढाया

हक़ की कमाई गुरु नानक देव जी की कहानी ( Haq Di Kamai Story In Hindi)

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Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi
Haq Di Kamai Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi

गुरु नानक देव जी भाई मरदाना जी के साथ सैद पुर पहुचते है वहा पहुचकर वह भाई
लालो जी के घर जाते है भाई लालो जी एक कारपेंटर था  वह  बहुत गरीब व्यक्ति था पर वह गुरु जी से बहुत
अधिक प्यार व लगाव रखता था

भाई लालो जी ने उनका अच्छे से आदर सत्कार कर गुरु जी को बिठाया और आराम करने
को कहा थोड़े समय बाद उन्होंने गुरु जी को खाना खिलाया , वेसे तो वह खाना बहुत साधारण
सा था क्योकि भाई लालो बहुत गरीब था उसके पास इतने पेसे नहीं थे की वह गुरु जी को मीठे
पकवान खिला सके ,पर फिर भी गुरु नानक देव और भाई मरदाना जी को वह खाना किसी
शाही पकवानों से कम नहीं लगा उन्होंने बड़े प्यार से उस खाने को खाया ,

Guru Nanak Dev Ji  All Stories In Hindi

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Guru Nanak Dev Ji Story Haq Di Kamai In Hindi

भाई लालो के कहने पर गुरु जी कुछ दिन भाई लालो के पास ही रुक गए ,और हर रोज वह सदारण
खाना बड़े चाव से खाते ,
उसी शहर मे एक बहुत बड़ा सेठ जिसका नाम मलिक भागो था वह भी रहता था | जब उसे पता चला
की गुरुनानक देव जी यहाँ पधारे हुए है तो उसने गुरु जी के पास संदेसा भेजा और उनकी सेवा करने मौका माँगा
गुरु नानक देव जी ने मलिक सेठ के इस न्योते को ठुकरा दिया , कुछ दिनों बाद फिर से
मलिक ने गुरु जी के पास नियोता भेजा और उनसे आग्रह किया की वह एक बार जरुर आये |

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पर इस बार भी गुरु जी ने उस न्योते को ठुकरा दिया , उसके 2 दिन बाद मलिक ने अपने घर पर
एक दावत रखी जिसमे उसने शहर के बड़े बड़े विदानो सेठो और पंडितो को खाने पर बुलाया और
इस बार वह खुद गुरु जी के पास आया और उन्हें अपने साथ चलने का आग्रह किया
गुरु जी ने कहा ठीक है उन्होंने भाई मरदाना और भाई लालो को भी अपने साथ ले लिया और
भाई लालो से कहा की अपने साथ खाना ले लो हम वहा जाकर यह खाना ही खायेगे |

भाई लालो उनकी इस बात पर बहुत हैरान तो हुए पर गुरु का हुक्म था वह पीछे कैसे हट सकते थे |
गुरु जी जब मलिक भगो के घर पहुच गए और अब उनके सामने अनेक प्रकार के भोजन परोस
दिए गए और गुरु जी के आस पास कुछ अन्य पुजारी पंडित लोग भी थे जिन्हें सेठ मलिक ने
उनकी मेहमान नवाजी के लिए उन्हें वहा बुलवाया हुआ था |
गुरु जी कहते है की मे यह खाना नहीं खा सकता हु क्योकि यह खाना गरीबो का खून पसीना
चूस कर उन पैसो से लिया गया है यह खाना हक की कमाई का नहीं है ,

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गुरु जी की इन बातो को सुनकर सबने अपने हाथ खाने के लिए रोक दिए यह देख सेठ
मालिक ने कहा की हे गुरु नानक यह आप कैसे कह सकते है यह खाना मेरी हक की कमाई
का ही है , इतना सुनते ही भाई गुरु नानक देव जी ने भाई लालो की एक रोटी उठाई और दुसरे
हाथ मे सेठ मलिक के मीठे पेडे उठाये और अपने दोनों हाथो की मुठियो को दबाया , वह नजारा
देख कर सब हैरान रह गए ..

जिस हाथ मे भाई लालो की सुखी रोटी थी जिस पर धी नहीं लगा हुआ
था उस रोटी से धी की धार निकलने लगी और दूसरी तरफ सेठ मलिक के मीठे पेडे मे से खून की
एक धार बहने लगी , धी की निकली धार इस बात का संकेत थी की यह रोटी खून पसीने से की गयी
हक की कमाई है और मालिक भागो की रोटी से निकलता खून इस बात की गवाही दे रहा था की वह
कमाई हक की नहीं है गरीब लोगो पर हुए अत्यचार और गरीबो की कमाई की रोटी है ,

यह देख सेठ
मलिक गुरु जी के चरणों मे गिर गया और उनसे माफ़ी मांगी और उन्हें धन्यवाद कहा ज्ञान का यह
पाठ पढ़ाने के लिए , तो इस तरह से गुरु जी ने यह एक और चमत्कार दिखा कर हक की कमाई और
गरीबो से लुटी गयी कमाई मे अंतर दिखाया ..Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi

Guru Nanak Dev Ji Story

गुरु नानक देव की  हरिद्वार की कहानी ( Guru Nanak Dev Ji Haridwar Story In Hindi)

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Guru Nanak Dev Ji In Haridwar ( Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi )

गुरु जी मरदाना जी के साथ हरिद्वार पहुचे , जहा पर हजारो की संख्या मे श्रदालु स्नान
करने पहुचते थे , सुबह के समय जब सब लोग स्नान कर रहे थे सूर्य देव को पितरो को
जल चड़ा रहे थे | वह सब लोग पूरब दिशा की और जल को अपने हाथो से चढ़ा रहे थे , तभी
गुरु नानक देव जी भी नदी मे उतर गए और पश्चिम दिशा मे जल को चढाने लगे , ऐसा करते
देख वहा के लोगो और पंडितो ने उनसे पूछा की आप हिन्दू है या मुसलमान ,आपको इतना भी
नहीं पता की जल को पूर्व दिशा मे चढ्या जाता है , गुरु जी ने पूर्व दिशा मे आप लोग किसे जल
चढाते है , पंडितो ने कहा हम अपने सूर्य भगवान और पितरो को जल चढाते है

Guru Nanak Dev Ji Haridwar Story In Hindi

गुरु जी ने फिर पूछा की क्या आप लोगो का जल वहा पहुच जाता है , पंडितो ने कहा हाँ हमारा
जल वहा पहुच जाता है
गुरु जी ने फिर पूछा की सूर्य देव यहाँ से कितना दूर है | जवाब मिला बहुत ज्यादा दूर है वहा तक कोई
नहीं पहुच सकता है
यह सुन कर गुरु नानक देव जी ने फिर से तेजी से जल पश्चिम दिशा मे फेकना शुरू कर दिया |
यह देख फिर पंडितो ने पूछा की यह आप क्या कर रहे है सूर्य देव तो पूर्व दिशा मे है ,
गुरु नानक ने कहा की मेरे खेत यहाँ से पश्चिम दिशा मे है इस बार बारिश ना होने की वजह से वहा
सूखा पड़ गया है इसलिए मे उन्हें जल चड़ा रहा हु ,

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Guru Nanak dev ji Ki Haridwar Main Kahani Hindi Main

पंडितो ने कहा ऐसा कैसे हो सकता है वहा तक जल कैसे पहुच सकता है
फिर गुरु नानक देव जी ने कहा जेसे आपका जल आपके पितरो और सूर्य देव तक पहुच सकता है
जो यहाँ से बहुत अधिक दुरी पर है जहा तक कोई नहीं पहुच सकता , तो यह जल मेरे खेतो मे क्यों
नहीं पहुचेगा वो तो ज्यदा दूर भी नहीं है | यह बात सुनकर सब पंडितो के हाथ रुक गए , उनकी आँखे
खुल चुकी थी इस तरह गुरु नानक देव जी ने हरिद्वार पहुच कर वहा भी जन कल्याण का उदहार किया
उन्हें अधकार से निकाल कर प्रकाश को दिखाया |……Guru Nanak Dev ji Sakhi Hindi

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सतश्रीअकाल दोस्तों मेरा नाम हरप्रीत सिंह है | सिंह फैक्ट डॉट काम मै आपका स्वागत है यहाँ पर आपको पढने के लिए मिलेगे रियल फैक्ट्स एंड स्टोरीज इन हिंदी मै और पंजाबी स्टेटस और शायरी , बस आप लोगो के प्यार और सपोर्ट की जरूरत है वह देते रहिये

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