guru hargobind singh hindi

Sri Guru Hargobind Singh Hindi – दोस्तों इस पोस्ट मे आपको जानने के लिए मिलेगा Sri Guru Hargobind Singh  story in Hindi मे और आप यह भी जान पायेगे की Sri Guru Hargobind Singh  ji Kon थे और उन्होंने क्या क्या कार्य किये और अंतिम समय मे Sri Guru Hargobind Singh Ji Jyoti jot kaise samaye कैसे   Sri Guru Hargobind Singh Ji Biography In Hindi

श्री गुरु हरगोबिन्द सिंह- Sri Guru Hargobind Singh Hindi

 

श्री गुरु हरगोबिन्द सिंह जी का जन्म और बचपन –Sri Guru Hargobind Singh JI ka Janam Or Bachpan

Sri Guru Hargobind Singh  Hindi-गुरु हरगोबिन्द सिंह जी का जन्म 19 जून 1595 में गुरु अर्जुन देव
जी और माता गंगा जी के घर (अमृतसर गुरु की वडाली) में हुआ |
बाबा प्रथ्वी चंद जी जो गुरु अर्जुन देव जी के बड़े भाई और गुरु घर
के शुरु से ही विरोधी रहे थे|

वह हरगोबिन्द सिंह को मार देना चाहते थे |क्योकि  वह गुरुगदी को
पाना चाहते थे पर गुरु पद उन्हें नहीं मिला इसलिए वह अब अपने बेटे को
गुरुपद दिलाना चाहते  थे |जाको राखे साईया मार सके ना कोये, हर
कोशिश मे वह असफल रहे |सब लोगो को पता चल चूका था की यह सब कोन कर रहा है |

Sri Guru Hargobind Singh Biography In Hindi

बाल अवस्था में ही गुरु जी घुड़सवारी सवारी और शस्त्र विद्या लेने लगे ,
उन्हें आने वाले समय के लिए तैयार किया जाने लगा |22 मई 1906 मे
गुरु अर्जुन देव जी ने लाहौर जाने से पहले गुरु हरगोबिन्द जी को वचन
किये और कहा आने वाले समय के लिए तैयार रहे ,एक बड़ी सिख फ़ौज की
स्थापना करे ,शस्त्र सजा कर गद्दी पर बेठे|

उस समय गुरु जी की उम्र 11 वर्ष थी|30 मई 1906 को गुरु अर्जुन देव जी
को यातनाये देकर शहीद कर दिया गया |गुरु हरगोबिन्द सिंह जी गद्दी पर
दो तलवारे पहन कर बेठे उन्होंने (मीरी )और (पीरी )की शुरुवात की और  सर
पर कलगी सजाई |यह मीरी और पीरी की दोनों तलवारें उन्हें बाबा बुड्डा जी ने पहनाई थी  |

गुरु जी को मीरी और पीरी का मालिक कहा जाता है ,गुरु नानक जी से लेकर
गुरु अर्जुन देव जी तक सारे गुरुओ को पीरी का मालिक कहा जाता है |गद्दी पर
बैठ कर गुरु जी ने आने वाली संगत को कहा की वह एक फ़ौज तैयार करना चाहते है
जो आने वाले समय मै जुल्मो से लड़ सके  इसलिए अब से आप  भेटा में अच्छे शस्त्र
और घोड़े दे कुछ ही समय में दूर दूर से नोजवान आने लगे और सेना मे भर्ती होने लगे |

Sri Guru Hargobind Singh Hindi

उन सबको शस्त्रों की विद्या देने के लिए कुछ लोग भी रखे गए |
भर्ती होने वाले लोगो में किसी भी प्रकार के धन की मांग नहीं की थी
वह लोग बस दो वक़्त की रोटी और कपडे मांगते थे |गुरु जी ने  अकाल
तख़्त साहिब को बनवाया |जहा वह बेठ कर प्रजा की समस्या सुना और प्रचार किया करते थे |

बंदी छोड़ और गुरु हरगोबिन्द सिंह जी – Guru Hargobind Singh ji ki bandi Chod Story In Hindi

जहागीर को चंदू शाह और कुछ अन्य लोगो ने गुरु घर के खिलाफ शुरु
से ही बहुत भड़काया था ,जो भी राजा उसे अपने लिए खतरा लगता वह
उसे अपना बंधी बना कर कैद मे डाल देता |एक बार जहागीर ने गुरु जी
को भी आगरा आने का बुलावा भेजा |गुरु जी  50 कलियों वाला चोला
और शस्त्रो से सजी पोशाक पहनते थे |

जब गुरु जी अपनी कुछ सेना के साथ आगरा पहुचे और जहागीर से मिले
तो उसे गुरु जी की ताकत और सेना को देखकर अच्छा नहीं लगा |उसने
वही पर गुरु जी को बंधी बना लिया और गवालियर के उस कैद खाने में भेज
दिया जहा उसने 52 और राजाओ को अपनी कैद में रखा हुआ था |

Sri Guru Hargobind Singh story In Hindi

वह उन्हें कुछ ऐसी दवाइया और नशा देता था जिसकी वजह से वह आलसी
और कमजोर हो जाते थे |गुरु जी के वहा जाते ही वह जगह एक मंदिर बन गयी ,
गुरु जी वहा रोज पूजा पाठ करते और सबको सुनाते जिसकी वजह से उन राजाओ
का वह नशा छुटने लगा गुरु जी ने सब राजाओ से कहा की वह उन दवाइयों का सेवन ना करे

,गुरु भक्ति और गुरु शक्ति से उनकी यह समस्या कुछ दिनों में ही ठीख हो गयी ,

गुरु जी को कैद करने पर सिखो और अन्य धर्म के लोगो ने बहुत अधिक रोष दिखाया |

सिख धर्म के लोग और गुरु जी को प्यार करने वाली संगत गवालिअर के उस किले के

बाहर आने लगे |सारी संगत उस किले की दीवारों को हाथ लगा कर पुरे किले की

परिक्रमा करती और गुरबानी गाती |( Sri Guru Hargobind Singh  Hindi )

कुछ अन्य कहानिया

Sri Guru Hargobind Singh Ji Biography In Hindi

सिख धर्म के लोग आज भी गुरूद्वारे और श्री गुरु ग्रन्थ साहिब जी
की परिक्रमा करते है |यह प्रथा इस घटना की यादगार के रूप में
आज भी प्रचलित है  |सिख प्रजा और साईं मिया मीर जी के रोष जताने
पर जहागीर को लगा अब गुरु हरगोबिन्द सिंह जी को कैद में रखना उचित नहीं होगा |

उसने घबराकर गुरु जी की रिहाई के लिए हुकुमनामा भेजा |
गुरु जी ने किले से बाहर निकलने के लिए मना कर दिया ,क्योकि
सभी  राजा गुरु जी को छोड़ कर जाने के लिए मना करने लगे सब
ने कहा हमे आप ने आध्यात्म का ज्ञान दिया परमात्मा की भक्ति सिखाई
हम सब आपके बिना नहीं रह पायंगे |

गुरु जी भी उन्हें वहा छोड़ कर जाना नहीं चाहते थे |गुरु जी ने हुकुमनामे
का जवाब में लिखा जब तक इन 52 राजाओ को मेरे साथ मुक्त नहीं किया
जाता वह किले से बाहर नहीं जायंगे |तब जहागीर ने दूसरा हुकुमनामे में
लिखा जितने राजा आपके दामन को पकड़ कर बाहर आ सकते है वह आ सकते है |
गुरु जी 50 कलियों वाला बहुत बड़ा चोला पहनते थे ,

Sri Guru Hargobind Singh  Hindi

गुरु जी ने 50 राजाओ को चोले की एक कलि पकड़ा दी और बाकि बचे 2 राजा के
हाथ पकड़ कर उन्हें बाहर ले आये |इस तरह गुरु जी ने 14 महीने कैद
में रहकर उन 52 राजाओ को उमर्कैद के बंधन से मुक्त किया |तब से गुरु
जी को बंधी छोड़ के नाम से भी जाने जाना लगा |

इस याद में गुरुद्वारा  दाता बंधी छोड़ साहिब उस स्थान पर स्थित  है |

श्री गुरु हरगोबिन्द सिंह जी के युद्ध – Guru Hargobind  Singh Ji Ke Yudh

गुरु जी मुगलों के खिलाफ युद्ध लड़ने और सेना की स्थापना करने
वाले पहले गुरु थे |उन्होंने पंजाब के मैदानों में मुगलों के साथ छह युद्ध लड़े।
लोग उनकी सेना के साथ खुद जुड़ते थे ,वह अधर्म का नाश करते थे गरीबो का
भला जिस वजह से उनकी फ़ौज काफी बड़ी हो गयी|गुरु जी ने यह सभी जंग लड़ी और फ़तेह हासिल की

  1. रोहिला की लड़ाई में फ़तेह
  2. करतारपुर की लड़ाई फ़तेह
  3. अमृतसर की लड़ाई फ़तेह
  4. हरगोबिंदपुर की लड़ाई फ़तेह
  5. गुरुसर की लड़ाई फ़तेह
  6. कीरतपुर की लड़ाई फ़तेह

गुरु हरगोबिन्द सिंह जी चाहते थे ,सिख कौम शान्ति, भक्ति एवं धर्म के साथ-साथ

अत्याचार एवं जुल्म का मुकाबला करने के लिए भी सशक्त बने

गुरु हरगोबिन्द सिंह जी की संतान –

गुरु हरगोबिन्द सिंह जी के 5 पुत्र और एक पुत्री हुई जिनके नाम बाबा गुरदिता,

बाबा सूरजमल, बाबा अनि राय, बाबा अटल राय, गुरु तेग बहादुर(पुत्र ) और

बीबी बीरो( पुत्री) बाबा गुरदिता जी के पुत्र  गुरु  हर राय जी को गुरुपद प्राप्त हुआ था |

गुरु हरगोबिन्द सिंह जी ज्योति जोत –

Sri Guru Hargobind Singh Ji Jyoti jot kaise samaye

गुरु जी 3 मार्च 1644 में कीरतपुर साहिब में ज्योति-जोत समाए |ज्योति जोत समाने से पहले उन्होंने गुरुगदी बाबा गुरदिता जी के पुत्र हर राय जी को दी जिनकी उम्र उस समय 14 वर्ष थी |गुरु जी बहुत परोपकारी योद्धा थे, उनका जीवन दर्शन जन के कल्याण से जुडा हुआ था।

यही कारण है कि उनके समय में गुरमतिदर्शन राष्ट्र के हर कोने तक पहुंचा और सिख लहर को प्रभावशाली बनाने में गुरु हरगोबिन्द जी का अद्वितीय योगदान रहा|गुरुद्वारा पातालपुरी आज भी उनके परोपकारो ,शान्ति के  संदेश को दर्शाता है | ( Sri Guru Hargobind Singh  Hindi )

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