Essay on Holi in Hindi | होली निबंध | Holi Par Nibandh

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Essay on Holi in Hindi – नमस्कार दोस्तों आपका स्वागत है सिंह फैक्ट डॉट कॉम पर दोस्तों इस लेख मै आपको  Long and Short Essay on Holi in Hindi मै मिलेगे  यह Holi Par Nibandh For Students 200, 500, 700 words के साथ मिलेगे यह सब निबंध class 1 , 2 ,3,4,5,6,7,8,9,10,11,12 के लिए है  –

Essay on Holi in the Hindi language For Students 100+ Words

होली पर (100 शब्दों का एक निबंध )

 

होली बसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक भारतीय पर्व है। यह प्राचीन पर्व साल के फाल्गुन महीने में मनाया जाता है। इस दिन सभी बड़े बच्चे और युवा रंगो से खेलते है । यह खुस्सियाँ बाटने वाला त्योहार हिन्दू धर्म के लोग बड़ी धूमधाम से मनाते है उत्साह से भरा ये पर्व हमारे लिये एक दूसरे के प्रति स्नेह और निकटता भी लाता है। इस पर्व मै लोग बड़े प्यार से आपस में मिलते है, गले लगते है और एक दूसरे को रंग लगा कर आनंद लेते है ।

इस पर्व के दौरान सभी मिलकर हारमोनियम ,ढोलक, तथा करताल की धुन पर धार्मिक और फागुन गीत गाते और सुनाते है । इस पर्व के दौरान हम लोग मीठे पकवान बनाते और कहते है है खासतौर से ज्यादातर लोग गुजिया, पापड़, हलवा, पानी-पूरी आदि खाते है। होली पर्व के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है।

यह मौज-मस्ती व मनोरंजन और खुशी का पर्व है। सभी लोग इस पर्व को उत्साह व सौहार्दपूर्वक से मनाते हैं। यह पर्व लोगों में प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है ।

 

Holi Par Nibandh 200 Words

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Essay on Holi in Hindi

होली पर निबंध (200 शब्दों का एक निबंध ) | Essay on Holi in Hindi 

 

  • प्रस्तावना

हिन्दुओं के द्वारा दीवाली की तरह ही होली भी मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण पर्व है जो वर्ष के फाल्गुन महीने में मनाया जाता है। जिस वजह से इस पर्व को वसंत ऋतु की भी शुरुआत माना जाता है। प्रत्येक वर्ष होली को मनाने की वजह इसका इतिहास और महत्व भी है।

  • होली का पर्व क्यों मनाया जाता है?

बहुत वर्ष पहले, हिरण्य कश्यप नाम के एक राजा थे जिनकी एक द्ष्ट बहन थी जिनका नाम होलिका था |होलिका अपने भाई हिरण्य कश्यप के पुत्र प्रह्लाद को अपने गोद में बिठा कर जलाना चाहती थी। प्रह्लाद भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे जिन्होंने होलिका के आग से प्रह्लाद को बचाया और उसी आग में होलिका को भस्म कर दिया।

तभी से हिन्दू धर्म के लोग बुराई के खिलाफ अच्छाई के विजय के रुप में हर वर्ष होली का पर्व मनाते है। रंगों के इस पर्व में सभी एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर दिन भर होली का जश्न मनाते है और बधाई देते है ।

  • निष्कर्ष

भारतवर्ष में होली का पर्व अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग तरीके से बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। यह रंग भरा पर्व है होली अन्य सभी त्योहारों से थोड़ा हटकर है क्योकि बुराई पर सचाई की जीत का इसका संदेश मौज-मस्ती और रंगो से परिपूर्ण है। मानव समुदाय अपने समस्त दुखों, उलझनों एवं संतापों को भुलाकर ही इस पर्व को उसकी संपूर्णता के साथ मिलजुल कर भाई चारे के साथ मनाता है।

 

Holi Par Nibandh 500 + Words | Essay on Holi In Hindi 500+ Words

होली निबंध (500 + शब्दों का एक निबंध ) | Essay on Holi in Hindi 

 

  • प्रस्तावना

होली भारतवर्ष का एक मुख्य पर्व है होली पर्व को रंगों का पर्व भी कहा जाता है इस दिन हर जगह सडको पर गलियों मै बच्चो बड़ो बुढो औरतो लडकियों युवाओ सबके हाथो और चेहरे पर रंग ही रंग दिखाई देता है पूरा शहर रंग से रंग जाता है और एक दूसरे को बहुत सारी खुशियां प्यार और भाईचारा देता है।

इस दिन को बहुत ही अच्छे ढंग से मनाया जाता है । होली का पर्व हर वर्ष पूर्ण चन्द्रमा के दिन मार्च (फागुन) के माह में मनाया जाता है। होली पर्व को प्यार, खुशी, सुख, और जीत का पर्व के रुप में भी जाना जाता है। सभी लोग एक-दूसरे के साथ प्यार और खुशी जाहिर करने के लिये इस पर्व को चमकीले और आकर्षक रंगों से धूम धाम से होली खेलते है। इस त्योहार का अपना एक अलग ही महत्व है इस पर्व को मनाने के पीछे कई सारे कारण, कहानिया और आस्था भी जुडी हुई है।

 

  • होली की कथा होली क्यों मनाई जाती है ?

बहुत समय पहले, एक राजा हुआ था जिसका नाम हिरण्य कश्यप था , उसकी बहन होलिका और उसका पुत्र जिनका नाम प्रहलाद था । प्रहलाद बचपन से ही भगवान विष्णु के भक्त थे जबकि उसके पिता हिरण्य कश्यप चाहते थे कि उसका पुत्र प्रहलाद उसकी पूजा करें। लेकिन भक्त प्रहलाद ने कभी अपने पिता की पूजा नहीं की और वह सदा भगवान विष्णु की ही पूजा करते रहे । हिरण्य कश्यप ने नाराज प्रहलाद को आग से जलाकर मारने की योजना बनाई।

उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठे जाये होलिका ने ऐसा ही किया क्योंकि होलिका के पास एक चुनरी थी जिसे वरदान मिला था कि आग उसे जला नहीं सकती , परंतु प्रहलाद को इस आग से कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन होलिका इस आग में जलकर भस्म हो गई। इसी प्राचीन कथा से होली पर्व का जन्म हुआ।

  • होली कैसे मनाई जाती है

इस पर्व के दौरान सभी मिलकर हारमोनियम ,ढोलक, तथा करताल की धुन पर धार्मिक और फागुन गीत गाते और सुनाते है । इस पर्व के दौरान हम लोग मीठे पकवान बनाते और कहते है है खासतौर से ज्यादातर लोग गुजिया, पापड़, हलवा, पानी-पूरी आदि खाते है। होली पर्व के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। यह मौज-मस्ती व मनोरंजन और खुशी का पर्व है।

सभी लोग इस पर्व को उत्साह व सौहार्दपूर्वक से मनाते हैं। यह पर्व लोगों में प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है ।होली का पर्व जैसे जैसे निकट आता जाता है वैसे वैसे हम नए उत्साह से ओतप्रोत होने लगते हैं । इस पर्व के मौके पर सभि अपने प्रियजनों रिश्तेदारों दोस्तों सगे संबधियो से मिलते है रंग और अबीर से होली खेलते है इस तरह लोग रंगों के इस पर्व में अपनों के संग खुशियाँ मनाते और बाटते है।

  • निष्कर्ष

होली भारतवर्ष  में मनाया जाने वाला रंगो और खुशियों का एक प्रमुख पर्व है। होली हमारे देश भारत  में राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाया जाता है क्योकि  इस दिन सारे   स्कूल, कालेज,  कार्यालय, बैंक और दूसरे सारे  संस्थान बंद रहते है ताकि सभी लोग मिलजुल कर अपने परिवार रिश्तेदारों दोस्तों के  साथ इस रंगीले पर्व का लुत्फ उठा सके।

इस पर्व में लोग आपस के मत-भेद आपसी लड़ाई झगडे भूल कर नई जीवन की शुरुआत के साथ अपने अंदर नई ऊर्जा को भी ले आते है । हिन्दू समाज का सारा परिवार इस अनोखे पर्व का पूरे वर्ष इंतजार करता है। हर जगह सडको पर गलियों मै बच्चो बड़ो बुढो औरतो लडकियों युवाओ सबके हाथो और चेहरे पर रंग ही रंग दिखाई देता है पूरा शहर रंग से रंग जाता है और एक दूसरे को बहुत सारी खुशियां प्यार और भाईचारा देता है।

Holi Par Nibandh 700 + Words | Essay on Holi 500+ Words

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होली पर निबंध (700 + शब्दों का एक निबंध) | Essay on Holi in Hindi 

 

  • प्रस्तावना

होली रंगों का प्रसिद्ध पर्व एक भरतीय त्यौहार है जो हर वर्ष फागुन के महीने में भारत के लोगों द्वारा बड़ी खुशी और उतसाह के साथ मनाया जाता है। होली पर्व ढेर सारी मस्ती और खिलवाड़ का त्योहार है खास तौर से छोटे बच्चे जो होली के एक हफ्ते पहले और बाद तक रंगों की मस्ती में झूमते रहते है ।

हिन्दू धर्म के लोगों द्वारा इसे पूरे भारत में मार्च के माह में मनाया जाता है खासतौर से उत्तर भारत में होली पर्व के आते ही मानो चेहरे पर एक अद्भुत सी मुस्कान और हर्सौउलास दिखती है । इस पर्व के दौरान सभी मिलकर हारमोनियम ,ढोलक, तथा करताल की धुन पर धार्मिक और फागुन गीत गाते और सुनाते है ।

इस पर्व के दौरान हम लोग मीठे पकवान बनाते और कहते है है खासतौर से ज्यादातर लोग गुजिया, पापड़, हलवा, पानी-पूरी आदि खाते है। होली पर्व के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। यह मौज-मस्ती व मनोरंजन और खुशी का पर्व है। सभी लोग इस पर्व को उत्साह व सौहार्दपूर्वक से मनाते हैं। यह पर्व लोगों में प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है

 

  • होली का पर्व क्यों मनाया जाता है?

वर्षो से भारतवर्ष में होली पर्व मनाने के पीछे कई सारी कहानीयाँ और पौराणिक कथाएं है। इस पर्व का अपना एक अलग ही महत्व है, हिन्दू धर्म की मान्यताओ के अनुसार होली का पर्व बहुत समय पहले प्राचीन काल से मनाया जा रहा है जब होलिका अपने भाई हिरण्य कश्यप के पुत्र को मारने के लिये आग में लेकर बैठी और खुद ही जल कर भस्म हो गई।

हिरण्य कश्यप नाम का एक राजा था जिसका पुत्र प्रह्लाद था वह भगवान विष्णु का भक्त था इसलिए हिरण्य कश्यप अपने पुत्र प्रहलाद को मारना चाहता था क्योंकि वो उसकी पूजा के बजाय भगवान विष्णु की आराधना करता था। इसी वजह से हिरण्य कश्यप ने अपनी बहिन होलिका को प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर आग में बैठने को कहा जिसमें भक्त प्रहलाद तो भगवान की किरपा से बच गये लेकिन होलिका मारी गई।

हिरण्य कश्यप की ये योजना भी असफल हो गई, क्योंकि प्रहलाद भगवान विष्णु का भक्त था इसलिये प्रभु ने स्वं उसकी रक्षा की। इस षड्यंत्र में होलिका की मृत्यु हुई और प्रहलाद बच गया। उसी समय से हिन्दू धर्म के लोग इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप मै मना रहे है।

होली से ठीक एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है जिसमें लकड़ी, घास और गाय के गोबर जिन्हें उपले भी कहा जाता है से बने ढेर में इंसान अपने आप की बुरी आदते भी इस आग में जलाता है। होलिका दहन के दौरान सभी इसके चारों ओर चक्कर लगाकर अपने अच्छे स्वास्थ्य और यश की कामना करते है होलिका दहन के अगले दिन रंगों का पर्वमनाया जाता है इस दिन बच्चे आपस में एक दूसरे को रंग लगा कर खुशी वयक्त करते है मौज मस्ती खेलकूद करते है और सब एक दुसरे को होली की शुभकामनाएं और सब को बधाई देते हैं।

होलिका दहन की अगली सुबह के बाद, सब लोग रंग-बिरंगी होली को एक साथ मनाने के लिये इकट्ठा हो जाते है । इसकी तैयारी होली आने से कुछ दिनों पहले ही शुरु हो जाती है, फिर क्या बच्चे और क्या बड़े सभी बेसब्री से इसका इंतजार करते है और होली पर्व लिये ढ़ेर सारी खरीददारी करते है।

भारत मै कई जगह पर एक हफ्ते पहले से ही लोग दोस्तों, पड़ोसियों और प्रियजनों के साथ पिचकारी और रंग भरे गुबारों से खेलना शुरु कर देते है। इस दिन लोग एक-दूसरे के घर जाकर रंग गुलाल तो लगाते ही है साथ ही साथ मजेदार पकवानों मिठाईयो का आनंद भी लेते है।

इस पर्व के दौरान सभी मिलकर हारमोनियम ,ढोलक, तथा करताल की धुन पर धार्मिक और फागुन गीत गाते और सुनाते है । इस पर्व के दौरान हम लोग मीठे पकवान बनाते और कहते है है खासतौर से ज्यादातर लोग गुजिया, पापड़, हलवा, पानी-पूरी आदि खाते है। होली पर्व के एक दिन पहले होलिका दहन किया जाता है। यह मौज-मस्ती व मनोरंजन और खुशी का पर्व है। सभी लोग इस पर्व को उत्साह व सौहार्दपूर्वक से मनाते हैं। यह पर्व लोगों में प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है ।

 

  • निष्कर्ष

इस पर्व में लोग आपस के मत-भेद आपसी लड़ाई झगडे भूल कर नई जीवन की शुरुआत के साथ अपने अंदर नई ऊर्जा को भी ले आते है । हिन्दू समाज का सारा परिवार इस अनोखे पर्व का पूरे वर्ष इंतजार करता है।

हर जगह सडको पर गलियों मै बच्चो बड़ो बुढो औरतो लडकियों युवाओ सबके हाथो और चेहरे पर रंग ही रंग दिखाई देता है पूरा शहर रंग से रंग जाता है और एक दूसरे को बहुत सारी खुशियां प्यार और भाईचारा देता है।

भारतवर्ष में होली का पर्व अलग-अलग प्रदेशों में अलग-अलग तरीके से बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है। यह रंग भरा पर्व है होली अन्य सभी त्योहारों से थोड़ा हटकर है क्योकि बुराई पर सचाई की जीत का इसका संदेश मौज-मस्ती और रंगो से परिपूर्ण है।

मानव समुदाय अपने समस्त दुखों, उलझनों एवं संतापों को भुलाकर ही इस पर्व को उसकी संपूर्णता के साथ मिलजुल कर भाई चारे के साथ मनाता है।

 

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