Chamkaur ki ladai in Hindi

दोस्तों इस पोस्ट मे हम बात करेगे Chamkaur ki ladai in Hindi मे  जिसे (Battle of Chamkaur In Hindi) के नाम से भी जाना जाता है इस पोस्ट मे मैंने chamkaur ka Yudh Ki Puri Kahani बड़े विस्तार से लिखी है इस कहानी के अन्दर आप जान पायेगे की Chamkaur ki ladai कहा हुई और किन किन के बीच हुई तो आईये जानते  है  (Battle of Chamkaur In Hindi) के बारे मे

Chamkaur ki ladai in Hindi

चमकौर का युद्ध (Battle of Chamkaur In Hindi)

Chamkaur ki ladai in Hindi-दोस्तों दुनिया मे जंग तो बहुत हुई है बड़े
बड़े योधा हुए है जिन्होंने कई भीषण युद्ध लड़े थे | पर जिस लड़ाई की बात आज
मे कर रहा हु दोस्तों ऐसी तो ना गुरु गोबिंद सिंह से पहले किसी ने लड़ी और ना
ही शायद ऐसी लड़ाई देखने को मिलेगी जिसमे एक तरफ करीब 43 सिंह  थे और
दूसरी तरफ 10 लाख से ज्यादा मुग़ल सेना

दोस्तों जरा सोच के देखिये किस शक्ति से उन सिंघो ने मुकाबला किया होगा |
कहानी 100 % सच्ची है क्योकि यहाँ पर आपको सिर्फ सच ही पढने को मिलने
वाला है तो दोस्तों आईये जानते है इस सच्ची घटना के बारे मे जिसे चमकौर के
युद्ध के नाम से जाना जाता है

गुरु गोबिंद सिंह जी ने कहा था की चिडया दे नाल मे बाज लडावा गीदड़। नु मे शेर
बनावा सवा लाख नाल एक  लडावा तभी गोबिंद सिंह नाम देहाय्वा   इसका  मतलब
शायद आप समज गए होंगे  नहीं समजे तो बता देता हु – चिडयो से मे बाज़ को लडवाता हु ,
गीदरो को मे शेर बनाता हु ,सवा लाख बन्दों से मे अपने एक बन्दे को लडवाता हु तबी गोबिंद सिंह नाल कहलवाता हु |

ये बात अब सच होने वाली थी और इस बात को सच कर दिखाने का समय आ भी गया
था और गुरु गोबिंद सिंह जी ने इस बात को सच करके भी दिखया कैसे आईये जानते है –

Chamkaur ki ladai in Hindi

दोस्तों जो औरंगजेब था वह गुरु गोबिंद सिंह को अपने आगे झुकाना चाहता था वह
चाहता था की गुरु गोबिंद सिंह मुगलों की अधीनता स्वीकार करले , इसके लिए उसने
हजारो कोशिशे की थी पर वह सफल नहीं हो पाया था , गुरु जी आनंद पुर साहिब मे थे
वजीर खान जो औरंगजेब का बजीर था उसने कुछ अन्य बजीरो के साथ मिलके आनंदपुर
साहिब के किले को पिछले 6 महीने से घेर रखा था , वजीर खां गुरु गोबिंद साहिब जी को
जिन्दा या मुर्दा पकड़ना चाहता था इसलिए किले को घेर रखा था|

ताकि जब राशन – पानी किले के अन्दर समाप्त हो जायेगा तो मजबूरन गुरु गोबिंद
सिंह जी को मुगलों की अधीनता स्वीकार करनी पड़ेगी | किले के अन्दर जितना राशन
था सब खत्म हो चूका था तो सभी सिंघो ने कहा की महाराज अब हमे किला छोड़ कर चमकौर
साहिब निकल जाना चाइये यहाँ सब खत्म हो चूका है गुरु जी अपने सिंघो से बहुत प्यार
करते थे इसलिए उन्होंने उनकी बात मान कर किले को छोड़ कर जाने का फैसला किया
, बाहर फ़ौज खड़ी थी|

Chamkaur ki ladai in Hindi (Battle of Chamkaur In Hindi)

निकलना आसान नहीं था, पर एक रात गुरु जी अपने जथे को लेकर चमकौर के
लिए रवाना हो गए | वह रात बारिश हो रही थी सर्दियों के दिन थे दिसम्बर का महिना था
,जब वह सिरसा नदी के पास पहुचे तो वह अपने पुरे उफान पर थी बारिश की वजह से
नदी का बहाव बहुत ही तेज था जिसे पार करना आसान नहीं लग रहा था और पीछे मुगलों

को पता चल चूका था की गुरु गोबिंद किले के अन्दर नहीं है वह भी उनके पीछे चल दिए
सिरसा नदी की तरफ , गुरु जी ने नदी को पार करने का फैसला लिया और कहा जिन
सिंघो के पास घोड़े है वह नदी को घोड़ो की मदद से पार करे और बाकि सिंह वापिस जाके
मुगलों की सेना को उलझा के रखो |

वैसा ही हुआ करीब 300 सिंह पीछे लौट गए और मुगलों के आने का इंतजार करने लगे |
इधर गुरु जी सबसे आगे थे और नदी पार करने के लिए नदी मे उतर गए उनके पीछे पीछे
सारा जथा था |पर इतना ठंडा पानी ऊपर से बारिश और नदी अपने उफान पर कुछ सिंह
घोड़ो के साथ बह गए और काफी दूर निकल गए और सब अलग अलग हो गए गुरु जी के

साथ उनके दो बड़े साहिबजादे और 40 सिंह ही नदी पार कर पाए | माता साहिब कौर और
माता सुन्दरी कौर भाई मणि सिंह जी के जथे मे थी नदी के बहाव के कारण वह गुरु जी के
जथे से कोसो दूर हो गए उनके साथ दो दसिया भी थी वह सब हरिद्वार से होते हुए कुछ दिनों
बाद दिली पहुची थी जिन्हें भाई मणि सिंह ने वहा पंहुचा दिया था |

Chamkaur ki ladai in Hindi (Battle of Chamkaur In Hindi)

गुरु जी के दोनों छोटे साहिबजादे अपनी दादी के साथ गंगू के साथ थे जो गुरु जी का
रसोइया था वह उन्हें अपने साथ पिंड खेह्डी ले गया जो वहा से करीब 15 km दूर था |
पूरा परिवार अलग हो चूका था सिंघो ने कहा हम छोटे साहिबजादो को ढूंड कर ले आते है

गुरु जी ने कहा यह उनके आखरी दर्शन थे इसके बाद उनके दर्शन नहीं होगे क्योकि
उन्हें सब पता था की अब उनके साथ क्या होने वाला है …महान है वो पिता जिसका जिगर
इतना बड़ा था जिसने हिन्द को बचाने के लिए अपने सारे मोह को त्याग दिया था .

जो सिंह पीछे मुगलों से लड़ रहे थे वह भी सहीद हो गए कुछ जख्मी हो गए  थे |जब मुग़ल
सेना  सिरसा नदी के पास पहुची तो मुग़ल फ़ौज की हिम्मत नहीं हुई की वह नदी को पार
कर सके वह वही रहकर नदी का बहाव कम होने का इंतजार करने लगे | पूरा दिन सफ़र
करने के बाद 21 दिसम्बर की शाम को गुरु जी का जथा चमकौर पंहुचा वहा के स्थानीय

लोगो ने गुरु जी की सेवा और  देखभाल की | वहा एक हवेली थी जो भाई बुधि चन्द्र जी की
थी उसमे गुरु जी को रात रुकवाया गया ,उस हवेली (किले ) की ख़ास बात यह थी की वह
एक उची जगह पर बनी थी जिसके चारो तरफ खुला मैदान फैला हुआ था |

Chamkaur ki ladai in Hindi (Battle of Chamkaur In Hindi)

अगला दिन 22 दिसम्बर जो सबसे छोटे दिनों मे माना जाता है पर गुरु जी ने इस छोटे दिन
को इतना बड़ा बना दिया |बारिश हो रही थी हद से ज्यादा ठण्ड पड़ रही थी मुग़ल फ़ौज चडाई
करके सामने आ गयी थी किले को पूरी तरह से घेर लिया गया अन्दर थे सिर्फ 40 सिंह गुरु
गोबिंद सिंह और उनके दो बड़े साहिब जादे अजित सिंह उम्र (18 ) और झुझार सिंह उम्र (14 )
होने वाली थी |सामने थे मुगलों के बड़े बड़े जरनैल और 10 लाख से ज्यादा मुग़ल फ़ौज |

वजीर खां ने चिट्ठी लिख कर भेजी उसमे लिखा था मुगलों की अधीनता स्वीकार करलो तुमारी
जिंदगी बक्श दी जाएगी | चिट्ठी का जवाब गुरु जी ने मुगलों की सेना पर तीरों की बारिश करके
दिया और कहा खालसा ना कभी किसी के आगे झुका है ना झुकेगा और बोले सो निहाल सतश्री
अकाल के जकारे गुजने लगे | कुछ बजीरो ने मिलकर किले पर सीडी लगाकर ऊपर चड़ने की
कोशिश की गुरु जी ने अपने तीरों से उन्हें वही मार गिराया |

गुरु जी ने 8 सिंघो को तयार किया उन्हें अपने हाथो से सजाया जेसे कोई पिता अपने बेटे की
शादी पर उसका सेहरा सजाता है उन्हें गले से लगया और उन्हें कहा सबके हिस्से मे सवा सवा
लाख बन्दे है जाओ और सहीदी पाओ क्योकि सब सिंघो को पता था हमने सहीद तो होना ही है
पर लड़ कर होगे |गेट खुला पहला जथा मैदान मे लड़ने के लिए बिजिली की फुर्ती की तरह जा
रहा था गुरु जी छत पर बैठ उनकी शहीदी को देख रहे थे और छत से तीर चला कर उनके लिए
रास्ता भी साफ़ कर रहे थे |

Chamkaur ki ladai in Hindi (Battle of Chamkaur In Hindi)

गुरु जी ने अपने सेवादार से कहा था जेसे ही कोई सिंह शहीदी को प्राप्त करेगा जाकारे छोड़े जाये|
सिंह बिजली की तरह मुगलों को काट रहे थे ऐसा लग रहा था जेसे कोई मशीन चल रही हो अन्दर
गुरु ने जो अमृत पान करवाया था उसकी शक्ति उफान पर थी पहला सिंह शहीदी को प्राप्त हुआ पूरा
किला बोले सो निहाल के जकारे से गुंग उठा बाकि के सिंघो मे यह सुन कर ऐसा जोश आ जाता था

की एक सिंह सच मे सवा सवा लाख पर भरी पड़ने लगा |लाशो के ढेर लगने लगे मुगलों के बड़े
बड़े जरनैल को समज नहीं आ रहा था की यह कैसे हो सकता है एक एक सिंह हमारी सेना को
चीरते हुए आखिर तक जाता है जहा सेना खत्म होती है और पुरे रस्ते लाशो के ढेर दिखाई देते है |
इतनी शक्ति मुग़ल जरनेलो ने अमृत की शक्ति के बारे मे सुना था पर पहली बार देख रहे थे

अरज किया है –

ऊपर बाटे दे लड़दिया वेख चिड़िया  किसे पूछ या दसो एह खेड की है चुंज पानी दी पहुचे ना
संघ विकर मारण बाज नु एदे विच भेद की है

Chamkaur ki ladai in Hindi 

जवाब दिता सिंह ने –

मुड के भेड़ेया पानी ना कही इस्णु , पत्थर किसे दे हीरे नु आखिए ना , एको समझिये ना
शेरा बिलिया नु ,चंगी तरह जे वेख परखिये ना ,बेशक सात समुन्दर हंगाले ने तू ,तेनु पता है
समुन्दर विच खार की है , ए पर भलेयाआ तेरे जेहे आदमी नु इस आवे हेयात दी सार की है ,
कतरा इस दा प्या कलरा ते ओथे खेडा बसंत  रचाइया ने |छु गया जे पत्थर डूबदया नु उन्हा
उठ के ताड़ीया लाइया ने |इन्हू सुन्घ्या आन के गीदड़आ ने , पैर शेरा दे उन्हा ने खडका दिते |
धोती वालेयया बाणीया  चखइया ता खंडे फड के उन्हा खडका दिते | एदे घुट विच पता नि राज
की है जेडा पी लेनदा ओह मौत मंगदा है | एक शीश दी किदरे लोड पे जाये सारा खालसा ओदरे भजदा है |

“इसका मतलब नहीं समझा सकता क्योकि कुछ शक्तियों को शब्दों मे बयान नहीं किया
जा सकता “
पहला जथा  युद्ध मे लड़ते लड़ते शहीदी को प्राप्त कर लेता है पर इस 8 सिंघो के जथे ने ही
पूरी मुग़ल सेना मे खौफ डाल दिया था हजारो की तादाद मे मुग़ल मारे जा चुके थे | दूसरा
जथा रवाना होता है और फिर वही होता है तबाही धीरे धीरे सब शहीद  हो जाते है| बड़े साहिबजादे
अजित सिंह उम्र 18 साल अपने पिता के पास आते है और कहते है मुझे भी शहीद होना है

Chamkaur ki ladai in Hindi (Battle of Chamkaur In Hindi)

युद्ध मे जाने की इजाजत मांगते है गुरु गोबिंद सिंह बहुत खुस्श होते है और गले लगा कर
साहिबजादे को अपने हाथो से सजा कर भेजते है |अजित सिंह की शकल अपने पिता से
बिलकुल मिलती थी मुगल सेना मे हाहाकार मच जाता है की गुरु गोबिंद सिंह खुद मैदान
मे आ गए है एक 18 साल का लड़का बड़े बड़े जरनेलो और मुगलों को मार गिरा रहा था और
गुरु गोबिंद सिंह छत पर बैठे तीरों से अपने पुत्र की मदद कर रहे थे |

थोड़ी देर बाद जब अजित सिंह शहीदी  को प्राप्त हुआ तो गुरु जी के सेवेदार के मुह से जकारा
नहीं निकल पाया क्योकि सब लोग साहिबजादो को बहुत प्यार करते थे | पर गुरु जी ने खुद
ही जकारा छोड़ा और खुद ही उसका जवाब भी दिया | बड़े भाई की शहीदी  छोटे भाई से देखी
नहीं गयी वह भी मैदान मे जाके जंग की इजाजत मांगने लगा पिता ने उन्हें भी गले से लगाकर

Chamkaur ki ladai in Hindi (Battle of Chamkaur In Hindi)

जाने दिया जुझार सिंह जिनकी उम्र उस समय 14 वर्ष भी पूरी नहीं थी  जिन्हें अभी अच्छे से तलवार
बजी नहीं सीखी थी वह भी मैदान मे जाकर लाशो के ढेर लगा देता है और करीब 30 मिनट तक
लड़ने के बाद शहीदी  को प्राप्त करता है और बाकि के सिंह भी |शाम हो जाती है लड़ाई बंद हो जाती है
मुगलों की सेना देखती है की सिर्फ 34 सिंह शहीद हुए है और हमारी आधी सेना तबाह हो चुकी है

गुरु गोबिंद सिंह तेयारी कर चुके थे की कल सुबह मैदान मे वह उतरेगे बाकि सिंघो को लेकर
पर बचे हुए सिंघो ने गुरु जी को वहा से जाने के लिए कहा जिस पर गुरु जी ने मना कर दिया |
काफी रात तक सिंह उन्हें जाने के बोलते रहे पर गुरु जी जाने के लिए तेयार नहीं थे |तब 5 सिंघो
ने मिलकर गुरु जी को हुकम दिया जिसके आगे गुरु जी को झुकना पड़ा ,इसकी वजह यह थी
की जब गुरु जी ने खालसा पंथ की स्थापना की थी अमृत पान करवाया था |

तब गुरु ने कहा था की इन 5 सिंघो का हुकुम गुरु का हुकुम होगा जो सबको मानना पड़ेगा|
सिंघो का कहना था की आप जहा जायेगे आपके कदम पड़ते ही हम जेसे सिंह आपके साथ जुड़
जायेगे आप अकेले ही खालसा फ़ौज की स्थापना कर सकते हो और हम 1 करोड सिंह मिलकर

Chamkaur ki ladai in Hindi (Battle of Chamkaur In Hindi)

आपके जेसा गुरु फिर से तेयार नहीं कर सकते इस हिन्द को अभी आपकी जरूरत है धर्म को
आपकी जरूरत है | तब गुरु जी ने कहा मे चोरो की तरह नहीं जाऊंगा मे ललकार कर जाऊंगा
इस बात के लिए सभी सिंघो ने रजामन्दी करदी |

गुरु जी ने छत पर जाकर जकारे लगाते हुए मुगलों और वजीर खां को कहा मे जा रहा हु
अगर किसी मे हिम्मत है तो मुझे पकड कर दिखा दे मे तुमाहरे बीच मे से ही जा रहा हु और
गुरु ने बाकि सिंघो को गले से लगाया और गेट खोल दिया गया वजीर खां और मुग़ल सेना

ने कोशिश की पर वह उन्हें नहीं पकड़ पाए बिजली की रफ़्तार के साथ गुरु जी उनके सामने
से निकल गए कोई उनका पीछा भी नहीं कर पाया |

बाकि के सिंघो ने भी अपनी आखरी सांस तक लड़ाई की और शहीदी  को प्राप्त किया |
वजीर खां इतनी बड़ी सेना लाने के वाबजूद भी गुरु गोबिंद सिंह को नही पकड़ पाया और
अपनी आधी से जयादा सेना को तबाह करवा बेठा |मुगलों को इस बार भी मुह की खानी पड़ी |

Chamkaur ki ladai in Hindi (Battle of Chamkaur In Hindi)

गुरु गोबिंद सिंह जी के पास इतनी शक्ति थी की वह बड़ी से बड़ी सेना से अकेले ही लड़
सकते थे पर उन्हें अपनी कौम के लिए धर्म के लिए हिन्द के लिए एक मिसाल देनी थी जो
वह दे गए |  अपना सब कुछ वार कर त्याग कर अपने पुत्र अपनी माँ राजगदी सब कुछ छोड़
कर उन्होंने हिन्दू धरम को मुग़ल शासको से बचाया और अगर उन्होंने यह क़ुरबानी ना दी होती
तो इस समय हम आज वो नहीं होते जो आज हम है | To Be Continued…….Chamkaur ki ladai in Hindi

नोट – दोस्तों अगर आप कमेंट के माध्यम से हमे आगे की कहानी लिखने के लिए कहेगे तो इससे आगे की story आपको जल्दी पढने के लिए मिल जाएगी

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दोस्तों कहानी अभी बहुत लम्बी है अगर आपको Chamkaur ki ladai in Hindi (Battle of Chamkaur In Hindi) story अच्छी लगी तो इस पोस्ट को ज्यादा से ज्यादा शेयर करे  ताकि जो लोग  भारत के इस गोरव मयी  इतिहास  को नहीं जानते वह भी जान पाए  धन्यवाद 

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सतश्रीअकाल दोस्तों मेरा नाम हरप्रीत सिंह है | सिंह फैक्ट डॉट काम मै आपका स्वागत है यहाँ पर आपको पढने के लिए मिलेगे रियल फैक्ट्स एंड स्टोरीज इन हिंदी मै और पंजाबी स्टेटस और शायरी , बस आप लोगो के प्यार और सपोर्ट की जरूरत है वह देते रहिये

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5 Comments on “”

  1. आज का हिंदुस्तान गुरू गोविन्द सिंह जी का ऋणी है जो कभी चुकाया नहीं जा सकता ।गर्व है हमें गुरू गोविन्द सिंह जी खालसा पर ।
    तारिफ में जो भी शब्द लिखूं वो गुरू गोविन्द सिंह जी की महानता के आगे छोटे ही रहेंगे । फिर भी लिख रहा हूं
    ,”महान गुरु ,महान योद्धा और महान बलिदानी

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