short moral story hindi

Short Moral Story In  Hindi

दोस्तों यहाँ पर  कुछ Short Moral Story Hindi  Best Moral Stories  Hindi मे दी गयी आशा है यह आपको बहुत पसंद आयेगी

3 Short Moral Story Hindi  Best Moral Stories  Hindi

Short Moral Story Hindi 1
A Man with a Lamp “Short Moral Story Hindi” Best Moral Stories  Hindi

एक छोटा सा गाँव था। वहां एक आदमी रहता था जो देख नहीं सकता था । वह अँधा था । फिर भी, जब भी वह रात में बाहर जाता था तो अपने हाथ मे एक लैंप उठाया करता था ।

एक रात को वह बाहर खाने के बाद घर आ रहा था, और गाँव में कुछ युवा यात्रियों का एक समूह आया था । वह अँधा आदमी उनके पास से जब गुजर रहा था तब

उन्होंने देखा कि वह अंधा है , फिर भी उसने एक लेम्प अपने हाथ मे ले रखा है । उन्होंने उस पर टिप्पणियां देना शुरू कर दिया और उसका मजाक उड़ाया।

उनमें से एक ने उससे पूछा, “आप अंधे हैं और कुछ भी नहीं देख सकते हैं! तो आप अपने साथ इस लैंप को क्यों लेते हैं ?!

अंधे आदमी ने जवाब दिया,   “हाँ, दुर्भाग्य से, मैं अँधा हूं और मैं कुछ भी नहीं देख सकता लेकिन यह लैंप जो मे अपने साथ रखता हु वह आपके जैसे लोगों के लिए है।

क्योकि आप अंधे आदमी को नहीं देख सकते हैं और मुझे धक्का दे सकते हैं। यही कारण है कि मैं एक लैंप साथ लेता हूं “।

यात्रियों के समूह ने उनके इस व्यवहार के लिए उस अंधे आदमी से माफी मांगी।

Moral: हमें दूसरों के बारे मे कुछ भी बोलने से पहले सोचना चाहिए। हमेशा विनम्र रहें और दूसरों के दृष्टिकोण से चीजों को देखना सीखें।

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Short Moral Story Hindi 2
Sometimes Just let it be (Short Moral Story Hindi) Best Moral Stories  Hindi

एक बार महात्मा बुद्ध एक शहर से दूसरे शहर में अपने कुछ अनुयायियों के साथ चल रहा थे । यह प्रारंभिक दिनों की बात थी ।

जब वे यात्रा कर रहे थे, तो उन्हें एक झील दिखाई दी । उन्होंने वहां रुक कर अपने शिष्यों में से एक को कहा , “मैं प्यासा हूं।

कृपया मुझे उस झील से कुछ पानी ला दे “।

शिष्य झील से पानी लेने चला गया। जब वह उस पर पहुंचा, तो उसने देखा कि कुछ लोग पानी में कपड़े धो रहे थे और, ठीक उसी समय,

एक बैल गाड़ी ने झील को दाहिनी तरफ से पार करना शुरू कर दिया।

जिसकी वजह से , पानी बहुत गन्दा हो गया , शिष्य ने सोचा, “मैं बुद्ध को यह गंदा पानी कैसे पीने दे सकता हूं ?!” तो वह वापस आया और बुद्ध को बताया,

“वहां पानी बहुत गंदा है। मुझे नहीं लगता कि यह पीने के लिए उपयुक्त है “।

तो, बुद्ध ने कहा, चलो पेड़ के नीचे बैठ कर थोड़ा आराम करते है ।

लगभग आधा घंटे बाद, बुद्ध ने फिर से उसी शिष्य से झील पर वापस जाने और उसे पीने का पानी लाने के लिए कहा।

शिष्य आज्ञाकारी रूप से झील पर वापस चला गया। इस बार उन्होंने पाया कि झील में बिल्कुल साफ़ पानी था।

तो उसने एक बर्तन में कुछ पानी इकट्ठा किया और इसे बुद्ध के पास लाया ।

बुद्ध ने पानी को देखा, और फिर उसने शिष्य की तरफ देखा और कहा, “देखो, तुमने पानी को थोड़ी देर वेसे ही रहने दिया जिसकी वजह से पानी मे मिली मिट्टी अपने आप नीचे बैठ गई।

और आपको साफ पानी मिल गया । इसके लिए किसी भी प्रयास की आवश्यकता नहीं थी “।

Moral: आपका दिमाग भी इसी तरह है। जब यह परेशान होता है, तो बस इसे होने दें। इसे थोडा समय दें। यह अपने आप शांत जाएगा। इसे शांत करने के लिए आपको किसी भी प्रयास की जरुरत नहीं है। जब हम शांत रहते हैं तो हम अपने जीवन के सर्वोत्तम निर्णय ले सकते हैं ।

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Short Moral Story Hindi 3
The Circle of Good Deed Short Moral Story Hindi  (Best Moral Stories  Hindi)

एक बार श्री कृष्ण और अर्जुन शहर के चारों ओर एक छोटी सी यात्रा के लिए गए थे। जब वह यात्रा कर रहे थे तब  एक गरीब दिखने वाले पुजारी ने उनसे  भीख मांगी।

अर्जुन ने उन्हें 100 स्वर्ण सिक्कों से भरा बैग दिया। पुजारी बहुत खुश हो गया और अर्जुन का धन्यवाद किया। वह पुजारी  अपने घर के लिए चल  दिया। पुजारी ने वहा

एक और व्यक्ति को देखा जिसे मदद की ज़रूरत थी। अगर पुजारी चाहता तो  उस व्यक्ति की मदद के लिए एक सिक्का या दो बचा सकता था। पर उसने ऐसा नहीं

कहा , लेकिन अपने घर की जाते हुए  एक चोर ने उसे सिक्कों के बैग से लूट लिया और भाग गया।

पुजारी निराश हो गया और भीख मांगने के लिए फिर से चला गया। अगले दिन फिर अर्जुन ने वही पुजारी भीख मांगते हुए देखा और वह हैरान था कि सिक्कों से भरा बैग

प्राप्त करने के बाद भी वह भीख मांग रहा है , उसने पुजारी को बुलाया और उससे इसके लिए कारण पूछा। पुजारी ने उसे पूरी घटना के बारे में बताया और अर्जुन को

फिर से दयालुता महसूस हुई। तो, इस बार उसने उसे हीरा  दे दिया।

पुजारी बहुत खुश हो गया और घर के लिए चल  दिया और उसने फिर से एक व्यक्ति  को देखा जिसे  मदद की ज़रूरत थी लेकिन उसने फिर से अनदेखा कर दिया | घर

पहुंचने पर, उसने सुरक्षित रूप से हीरे को पानी के खाली बर्तन में रख दिया और बाद में इसे बेचने के लिए योजना बनाने लगा। उसकी पत्नी घर पर नहीं थी। वह बहुत

थक गया था इसलिए उसने झपकी लेने का फैसला किया। बीच में, उसकी पत्नी घर आई और पानी के खाली बर्तन को उठाया, पानी भरने के करीब की एक नदी की

ओर चली गयी , उसने बर्तन में हीरा नहीं देखा था। नदी पर पहुंचने पर, उसने पूरे बर्तन को भरने के लिए नदी के पानी में डाल दिया। उसने बर्तन तो भर लिया  लेकिन

हीरा पानी के प्रवाह के साथ बह गया था!

 

जब पुजारी जागा , तो वह बर्तन देखने गया और हीरे के बारे में अपनी पत्नी से पूछा। उसने उसे बताया, उसने कहा उसने किसी हीरे को नहीं देखा था और वह  नदी में

खो गया होगा। पुजारी अपने  दुर्भाग्य पर विश्वास नहीं कर सका और फिर भीख मांगना शुरू कर दिया। फिर अर्जुन और श्री कृष्ण ने उन्हें भीख मांगते हुए देखा और

अर्जुन ने इसके बारे में पूछा। अर्जुन बुरा महसूस कर रहा था और सोच रहा था कि क्या यह  पुजारी कभी  खुशहाल जीवन यापन  कर पायेगा ।

 

श्रीकृष्ण जो भगवान के अवतार हैं मुस्कुराए। श्री कृष्ण ने उस पुजारी को एक सिक्का दिया जो एक व्यक्ति के लिए दोपहर का भोजन या रात का खाना खरीदने के लिए

पर्याप्त नहीं था। अर्जुन ने श्रीकृष्ण से पूछा, “हे भगवान, मैंने उसे सोने के सिक्के और हीरे दिए, जो उन्हें एक अमीर जीवन दे सकता था, फिर भी उससे इसकी  मदद नहीं

नहीं हो पायी । सिर्फ एक सिक्का इस गरीब आदमी की मदद कैसे करेगा? “श्री कृष्ण ने मुस्कुराया और अर्जुन से उस पुजारी के पीछे जाने  और पता लगाने के लिए कहा।

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पुजारी सोच रहा था कि एक सिक्का जो श्री कृष्ण ने उसे दिया, वह एक व्यक्ति के लिए दोपहर का खाना भी नहीं खरीद सकता। वह इसका क्या करेगा ? उसने एक

मछुआरे को देखा जो अपने जाल से मछली निकाल रहा था। मछली संघर्ष कर रही थी। पुजारी ने मछली पर दयालुता  महसूस कि। उसने सोचा कि यह एक सिक्का

मेरी किसी भी  समस्या का समाधान नहीं करेगा, तो क्यों ना मे उस मछली को बचा लू । तो पुजारी ने मछुआरे को उस मछली  भुगतान किया और मछली को खरीद

लिया । उसने मछली को पानी के अपने छोटे बर्तन में रखा जो वह हमेशा अपने साथ रखा करता  था।

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मछली उस पानी के बर्तन मे थी, और उसने अपने मुंह से हीरा बाहर निकाल दिया , यह वही हीरा था जो उसकी पतनी ने नदी मे गिरा दिया था | यह देख  पुजारी ने खुशी

से चिल्लाया, “मुझे मिल गया, मुझे मिल गया”।वह घर की तरफ आगे बढ़ ही रहा था वह उस जगह पर पहुच गया जहा उस चोर ने पुजारी से , 100 सोने के सिक्कों के

बैग को लूट लिया था, वह चोर भी वही पर था , वह चोर  घबरा गया पुजारी ने भी उसे पहचान लिया । उसने पुजारी से माफ़ी मांगी और 100 बैग सोने से भरा बैग वापस

कर दिया। पुजारी विश्वास नहीं कर सका कि यह क्या हो रहा है उसके साथ ।

 

अर्जुन ने यह सब देखा और कहा, “हे भगवान, अब मैं तुम्हारा खेल समझता हूं”।

 

Moral: जब आपके पास दूसरों की मदद करने के लिए पर्याप्त होता है, तो दुसरो की मदद जरुर करे । आपके अच्छे कर्मों का हमेशा आपको फल दिया जायेगा ।

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