guru amar das ji

Sri Guru Amar Das Ji story in hindi

(ਗੁਰੂ ਅਮਰ ਦਾਸ ਜੀ)(गुरु अमर दास जी )

(5 मई 1479 – 1सितंबर 1574)

Sri Guru Amar Das Ji story in hindi-गुरु अमर दास जी का जनम 5 मई 1479 को बासरके गिल्लां  गाँव जो अमृतसर पंजाब में स्थित जगह पर जनम लेकर उस धरती को पवित्र किया। गुरु अमर दास जी का जनम नानक जी के जनम के १० साल बाद हुआ था।  गुरु अमर दास जी के पिता तेज भान और माता बख्ती  जी थे ।

गुरु अमर दास जी को सिख बनने से पहले भाई अमर दास जी नाम से जाना जाता था , भाई अमर दास जी एक बहुत ही धार्मिक वैष्णव हिन्दू थे। जिन्होंने अपना  अधिकांश जीवन धार्मिक पूजा पाठ धार्मिक यात्रा धार्मिक अनुष्ठानों में बिताया।

भाई अमर दास जी का विवाह माता मनसा देवी जी से हुआ तथा उनके 4 बच्चे हुए  पुत्र (भाई मोहन और भाई मोहरी)और पुत्रिया (बीबी भानी और बीबी दानी )।

  

गुरु अंगद देव जी से मुलाकात –

एक बार भाई अमर दास जी ने गुरु नानक जी के सबद  बीबी अमरो जी के मुख से सुने ,बीबी अमरो जी गुरु अंगद देव जी की पुत्री थी। जिनका विवाह भाई जसो जी से हुआ था। भाई जसो जी के पिता का नाम भाई मानक चंद जी था। जो भाई अमर दास के छोटे भाई थे, जो उनके घर के पास ही रहते थे ,

बीबी अमरो जी जी जब सबद गा रही थी। तब भाई अमर दास जी आस पास थे वेह सबद सुनने के बाद वो बहौत प्रभावित हुए और गुरु अंगद देव जी से मिलने के लिए खादुर साहिब जहा अंगद देव जी रहते थे वहा गये जब ये घटना हुई थी तब भाई अमर दास जी की उम्र 61 वर्ष थी ।

गुरु अंगद देव साहिब जी से मिलने के बाद गुरु का संदेश ने उन्हें इतना छुआ था कि वह एक सिख बन गए थे।जल्द ही वह गुरू और समुदाय की सेवा में शामिल हो गए और भाई अंगद देव जी के साथ रहने लगे।

श्री गुरु अंगद देव साहिब जी की सेवा करने लगे भाई अमर दास जी सुबह जल्दी उठ कर गुरु अंगद देव जी के स्नान करने के लिए दूर नदी से पानी भर कर लाते लंगर बनाने के लिए लकडिया लाते गुरु अंगद देव जी के कपडे धोते उन्होंने खुद को पूरी तरह गुरु सेवा में समर्पित किया ।

गुरु राम  दास की सेवा भक्ति देख कर गुरु अंगद देव जी ने ज्योति जोत सम्नाने से पहले मार्च 1552 में गुरुगदी दी जब उन्हें गुरु जी की उपाधि मिली तब उनकी उम्र 71 वर्ष थी

गुरु अमरदास जी के कार्य –

  • उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान लंगरों के आयोजनों   पर  विशेष  दिया
  • गुरु के दर्शन से पहले लंगर खाना
  • जाति पर्णाली को समाप्त किया
  • स्त्री और पुरषों के भेदभाव को दूर किया सबको एक सामान बतया सती स्त्रियों को अपना मुख ढकने की प्रथा बंद की
  • सिख मण्डली के बढ़ते आकार के प्रबंधन के लिए एक प्रशासन प्रणाली की स्थापना, जिसे मंजिस  कहते हैं
  • आनंद साहिब बानी (पाठ )जो सिख हर रोज पढ़ते है
  • गोइंदवल शहर की स्थापना की15 52 में
  • गुरु अमरदास जी  ने कुल मिलाकर 907 भजन श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी  को दिए।
  • गुरु अमरदास जी ने सती प्रथा का विरोध किया और विधवाओं के पुनर्विवाह करवाने का समर्थन किया

 

गुरु अमर दास जी ज्योति जोत- 

गुरु अमरदास जी 1 सितम्बर 1574 को 95 वर्ष की आयु में गोइंदवाल अमृतसर के निकट ज्योति ज्योत समाये ज्योति जोत समाने से पहले वो अपनी गुरुगदी (गुरु पद )

उनके दामाद गुरु राम दास जी को दी उन्होंने अपना गुरुपद अपने पुत्रो को नहीं दिया।

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